UP: प्रदेश सरकार ने ट्रांसजेंडर समुदाय की भलाई के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब प्रदेश के ट्रांसजेंडर नागरिकों को भी राशन कार्ड जारी किए जाएंगे, जिससे वे सस्ती दरों पर खाद्य सामग्री प्राप्त कर सकें। सरकार द्वारा पूरे राज्य में विशेष अभियान चलाकर उन ट्रांसजेंडर लोगों की पहचान की जाएगी, जो अभी तक इस सुविधा से वंचित हैं। खाद्य एवं रसद विभाग ने सभी जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे पात्र ट्रांसजेंडर नागरिकों को “पात्र गृहस्थी” श्रेणी में शामिल करें और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत उन्हें राशन कार्ड दें। यह प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और समावेशी बनाई जाएगी ताकि कोई भी हकदार व्यक्ति पीछे न छूटे।
ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए क्यों है यह अहम फैसला
राज्य ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड के अनुसार, आज भी बड़ी संख्या में ट्रांसजेंडर लोग शिक्षा, नौकरी और सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं। उनके पास पहचान के अभाव में राशन कार्ड तक नहीं होता। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का उद्देश्य है कि, किसी भी नागरिक को, उसकी पहचान चाहे जो भी हो, सरकारी योजनाओं से वंचित न रखा जाए। राशन कार्ड मिलने से इस समुदाय को खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ सम्मान और समाज की मुख्यधारा में जुड़ने का मौका मिलेगा। अब तक राज्य सरकार ने 1,067 ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को पहचान पत्र और 248 छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान की है। इससे उन्हें शिक्षा में आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिल रही है।
बुजुर्ग ट्रांसजेंडरों के लिए विशेष देखभाल
वहीँ 60 वर्ष से अधिक उम्र के ट्रांसजेंडर नागरिकों के लिए वृद्धाश्रम की व्यवस्था भी शुरू की गई है, जहां उन्हें जरुरत की सभी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। हर जिले में ट्रांसजेंडर सुरक्षा सेल की स्थापना की गई है, जो इस समुदाय की समस्याओं का समाधान जिलाधिकारी की निगरानी में करती है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनुपालना में पहल
सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में ट्रांसजेंडर समुदाय को तीसरे लिंग के रूप में मान्यता दी थी और सरकारों को उन्हें समान अधिकार देने के निर्देश दिए थे। उसी दिशा में योगी सरकार गरिमा गृह, छात्रवृत्ति, पहचान पत्र, वृद्धाश्रम और अब राशन कार्ड जैसी योजनाएं लागू कर रही है। यह निर्णय ट्रांसजेंडर समुदाय को एक गरिमापूर्ण और सुरक्षित जीवन की ओर ले जाने वाला ठोस कदम है, जिससे ‘सबका साथ, सबका विकास’ का संकल्प और मजबूत होता है।
