Lucknow: राजधानी लखनऊ में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने घोषणा करते हुए कहा कि, 29 मई को पूरे देश में बिजली क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ ज़ोरदार प्रदर्शन किया जाएगा। इससे पहले उत्तर प्रदेश के सभी ज़िलों और परियोजनाओं में व्यापक विरोध-प्रदर्शन होंगे।
देशभर के 27 लाख बिजलीकर्मी होंगे शामिल
नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की कोर कमेटी की ऑनलाइन बैठक में यह फैसला लिया गया कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के विरोध में यह आंदोलन किया जाएगा। इस आंदोलन में देशभर से करीब 27 लाख बिजली कर्मचारी उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों के समर्थन में हिस्सा लेंगे।
14 मई से चल रहा है ‘वर्क टू रूल’ आंदोलन
कर्मचारियों ने 14 मई से ‘वर्क टू रूल’ आंदोलन शुरू कर रखा है, जिसमें केवल तय समय के भीतर ही कार्य किया जा रहा है और निर्धारित समय के बाद प्रबंधन से सहयोग नहीं किया जा रहा है। समिति ने चेतावनी दी है कि, यदि शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने की कोशिश की गई तो सरकार को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
निजीकरण के लिए घाटा दिखा रहा है पावर कॉरपोरेशन : दुबे
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने आरोप लगाया कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन जानबूझकर अपनी बैलेंस शीट में घाटा बढ़ा-चढ़ा कर दिखा रहा है ताकि निजीकरण को जायज ठहराया जा सके। उन्होंने कहा कि, 30 फीसदी बिजली दर बढ़ाने का प्रस्ताव इसी दिशा में उठाया गया कदम है, जो निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाने की साजिश है।
