UP NEWS: भारत की आत्मा उसकी आध्यात्मिकता में बसती है, और उत्तर प्रदेश को इस आध्यात्मिकता का केंद्र कहा जाए तो कोई बड़ी बात नहीं होगी। अयोध्या में प्रभु श्रीराम का जन्मस्थान, काशी में बाबा विश्वनाथ का धाम, मथुरा में श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं – ये सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की जड़ें हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अब इन तीर्थ स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने और धार्मिक पर्यटन को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए एक 4560 करोड़ रुपये की महायोजना की घोषणा की है।
क्या है इस महायोजना का उद्देश्य?
इस योजना का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाना है। इसका सीधा लाभ न केवल श्रद्धालुओं को मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार, व्यापार और पहचान के नए द्वार भी खुलेंगे।
किन-किन स्थानों का होगा कायाकल्प?
इस महायोजना के अंतर्गत कई धार्मिक शहरों और तीर्थ स्थलों को चुना गया है, जिनमें प्रमुख हैं:
1. अयोध्या
राम मंदिर के निर्माण के साथ-साथ अब शहर में रिवरफ्रंट डेवलपमेंट, हाईटेक पार्किंग, नई सड़कों, और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी पर जोर दिया जा रहा है।
2. काशी (वाराणसी)
काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर की सफलता के बाद अब घाटों का नवीनीकरण, गंगा आरती स्थल का आधुनिकीकरण और धार्मिक यात्रियों के लिए स्मार्ट सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं।
3. मथुरा-वृंदावन
ब्रज क्षेत्र को एक ‘राधा-कृष्ण सर्किट’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें तीर्थ ट्रेन, इलेक्ट्रिक बसें और हरित (ग्रीन) इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।
4. चित्रकूट, नैमिषारण्य, विंध्याचल और अन्य स्थल
इन स्थानों पर भी धार्मिक गलियारे, धर्मशालाएं, श्रद्धालुओं के लिए सुविधा केंद्र, और आधुनिक डिजिटल गाइड सिस्टम तैयार किए जा रहे हैं।
यह योजना केवल आस्था की नहीं, आर्थिक प्रगति की भी योजना है। पर्यटन उद्योग में स्थानीय लोगों के लिए गाइड, होटल, हस्तशिल्प, परिवहन और खानपान जैसे कई क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तैयार होंगे।
