Lucknow: मानव मानव एक समान, जाति-पाति का मिटे निशान, नशामुक्त हो हर इंसान, तब एक बनेगा हिंदुस्तान” — इस प्रेरणादायक नारे के साथ आज लखनऊ के ऐतिहासिक गांधी भवन सभागार में एक अद्वितीय और हृदयस्पर्शी दृश्य देखने को मिला। देश के कोने-कोने से आए विभिन्न पंथों, समुदायों और संप्रदायों के संत-महात्माओं ने “मानव समाज एकजुटता संत महासम्मेलन” के मंच पर एकजुट होकर मानवता, सामाजिक समरसता और नशामुक्त भारत के संकल्प को बुलंद किया।

इस महासम्मेलन में बौद्ध भिक्षु शील रतन जी, कबीर पंथी ज्ञानेन्द्र शास्त्री, जय गुरुदेव के नागेश्वर द्विवेदी, ब्रह्माकुमारी सुमन दीदी, रामकृष्ण मिशन के देशराज परमहंस, महर्षि वाल्मीकि परंपरा, गायत्री परिवार, महावीर जैन समुदाय, निषाद राज, और सनातन परंपरा से ब्रजेन्द्र स्वरूप जी सहित कई संतों ने सम्मिलित होकर यह स्पष्ट संदेश दिया कि समाज को बचाने के लिए नशामुक्ति अनिवार्य है।

पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और “नशामुक्त समाज आंदोलन अभियान कौशल” के संस्थापक कौशल किशोर ने अपने भावुक संबोधन में कहा, “जातिवाद और नशा दोनों समाज को दीमक की तरह खा रहे हैं। इनका अंत करने में संत समाज की भूमिका निर्णायक होगी।” उन्होंने इस सम्मेलन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को समर्पित बताया, जिन्होंने आतंकवाद और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ मजबूत नीति अपनाई है।

सम्मेलन के उपरांत सभी संतों और उपस्थित जनसमूह ने गांधी भवन से परिवर्तन चौक स्थित सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा तक एक पदयात्रा निकाली। पदयात्रा के दौरान “मानव मानव एक समान…” का उद्घोष वातावरण में गूंजता रहा, जो एकता, भाईचारे और नशामुक्त भारत की उम्मीदों का स्वर बन गया। इस ऐतिहासिक महासम्मेलन में लगभग 1500 संतों और 4000 से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इसके साथ ही सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक क्षेत्र की अनेक हस्तियां भी उपस्थित रहीं, जिनमें विधायक अमरेश कुमार रावत, विधायक जयदेवी कौशल, पारख महासंघ के उपाध्यक्ष तेजीराम रावत, भाजपा, एससी मोर्चा के पदाधिकारी विकास किशोर आशू, राम कुमार राही, शिशिर यादव, विनय कुमार वर्मा, निर्मल वर्मा इत्यादि। सामाजिक कार्यकर्ता एवं संत समर्पित संगठन जैसे साईं धाम के अमित शर्मा व पायल शर्मा, शकुंतला निषाद, रेखा सिंह एडवोकेट, कीर्ति राठौर सहित कई सम्मानित प्रतिनिधि। सम्मेलन ने विशेष रूप से विंग कमांडर व्योमिका सिंह और कर्नल सोफिया कुरैशी जैसी भारत की वीरांगनाओं को भी श्रद्धांजलि और सम्मान अर्पित किया, जिन्होंने देश की सुरक्षा में गर्वजनक भूमिका निभाई है।

 

संघर्ष से संकल्प की ओर
यह सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक सामाजिक क्रांति की शुरुआत है — उन आँखों के आँसुओं का उत्तर है जो नशे के कारण रोती हैं, उन अभिभावकों की पुकार है जिनके बच्चे इस दलदल में फंस गए हैं, और उस भारत की चेतना है जो अब जाग रहा है।

admin

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *