UP: शासन के निर्देश पर विजिलेंस विभाग ने बिजली विभाग के दो अधिकारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में एफआईआर दर्ज की है। वहीं, पांच अन्य अभियंताओं पर भी जल्द ही कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। इसके अतिरिक्त, करीब 11 अभियंताओं की गतिविधियां भी निगरानी में हैं।

अभियंताओं ने जोड़ा निजीकरण से

इस मामले को लेकर अभियंताओं ने आरोप लगाया है कि यह कार्रवाई निजीकरण विरोधी आंदोलन को दबाने का प्रयास है। अभियंता संघ के महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर ने पावर कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष गोयल की संपत्तियों की भी जांच कराने की मांग की है।

मार्च 2023 की हड़ताल के बाद जांच तेज

पिछले वर्ष मार्च में हुई हड़ताल के पश्चात विजिलेंस विभाग ने लगभग 18 अभियंताओं और अन्य कर्मचारियों की जांच शुरू की थी। जांच के बाद सात लोगों की सूची बनाई गई। 16 अगस्त 2023 को ठाकुरगंज क्षेत्र के सहायक अभियंता जितेंद्र सिंह गुर्जर की संपत्तियों की जांच का आदेश दिया गया। विजिलेंस रिपोर्ट के अनुसार, जितेंद्र सिंह ने वैध स्रोतों से लगभग ₹66 लाख की आय दिखाई, लेकिन उनकी संपत्ति व अन्य खर्च ₹75 लाख से अधिक के पाए गए। इस प्रकार ₹12.5 लाख की संपत्ति उनकी आय से अधिक पाई गई। जब उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया तो वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके, जिसके बाद मामला दर्ज करने की अनुमति शासन से मांगी गई।

जय प्रकाश भारतीय पर भी मामला दर्ज

इसी प्रकार, पूर्व में चौक और वर्तमान में उन्नाव में तैनात अभियंता जय प्रकाश भारतीय की जांच भी की गई। वे जूनियर इंजीनियर्स संगठन के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं। जांच में सामने आया कि उनकी आय ₹1.07 करोड़ रही जबकि उनके खर्च व संपत्तियां ₹1.46 करोड़ के आस-पास थीं। संतोषजनक जवाब न मिलने पर उनके खिलाफ भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया गया।

संघ का विरोध: उत्पीड़न बताया

राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ का कहना है कि यह कार्रवाई एकतरफा और मनगढ़ंत है। महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा, “हड़ताल के समय हमें धमकाया गया कि सहयोग न करने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। अब मुकदमे दर्ज कर हमें डराने की कोशिश की जा रही है, लेकिन हम पीछे हटने वाले नहीं हैं। निजीकरण का विरोध हर हाल में जारी रहेगा।

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