Lucknow: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में एक गंभीर खामी सामने आई है। नैक (राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद) मूल्यांकन के लिए पहुंची टीम के निरीक्षण के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ हुआ है। जहाँ पोस्टमॉर्टम जैसे तकनीकी और विशेषज्ञता वाले कार्य को विशेषज्ञ फॉरेंसिक डॉक्टरों के बजाय सामान्य चिकित्सकों द्वारा किया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, नैक टीम ने KGMU के पोस्टमॉर्टम हाउस का दौरा किया, जहां विश्वविद्यालय में फॉरेंसिक विभाग के पास विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद होने के बावजूद, पोस्टमॉर्टम की जिम्मेदारी बाल रोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ और सामान्य सर्जनों को दी जा रही है।

जब टीम ने इस मुद्दे पर सवाल किया, तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने सफाई देते हुए कहा कि, गाइडलाइंस के अनुसार, किसी भी डॉक्टर को पाँच साल की सेवा के बाद पोस्टमॉर्टम ड्यूटी पर लगाया जा सकता है। प्रशासन ने यह भी तर्क दिया कि, यदि फॉरेंसिक विशेषज्ञों को ड्यूटी पर लगा दिया जाएगा, तो उनकी शिक्षण और प्रशिक्षण गतिविधियाँ प्रभावित होंगी।

टीम ने उठाए सवाल:- 

हालाँकि, टीम ने यह सवाल उठाया कि जब विभाग में चार विशेषज्ञ डॉक्टर, चार सीनियर रेजिडेंट, 13 जूनियर रेजिडेंट और एक स्पेशलिस्ट पहले से उपलब्ध हैं, तो अन्य विभागों के डॉक्टरों को क्यों इस कार्य में लगाया जा रहा है। टीम का मानना है कि, इससे न केवल पोस्टमॉर्टम की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं, बल्कि संबंधित डॉक्टरों की नियमित चिकित्सा सेवाएं भी प्रभावित होती हैं। इस मुद्दे को नैक टीम ने अपनी रिपोर्ट में विशेष रूप से शामिल किया है। माना जा रहा है कि, आने वाले दिनों में केजीएमयू प्रशासन को इस मामले में जवाबदेही तय करनी पड़ सकती है।

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