काठमांडू। नेपाल की राजनीति में अभूतपूर्व घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। लगातार बढ़ते जनाक्रोश और युवाओं के बवाल के बीच पहले गृह मंत्री, फिर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और अब राष्ट्रपति ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस तरह तीनों शीर्ष पदों से एक साथ इस्तीफे ने नेपाल की राजनीति को गहरे संकट में डाल दिया है।
जानकारी के मुताबिक, बीते कई हफ्तों से देशभर में Gen-Z युवाओं के नेतृत्व में आंदोलन चल रहा था। रोजगार, शिक्षा, भ्रष्टाचार और व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले चुका है। काठमांडू समेत कई शहरों में लाखों युवा सड़कों पर उतर आए थे।
युवाओं के बढ़ते दबाव और प्रदर्शन के हिंसक रूप लेने के बाद सरकार पर संकट गहराता चला गया। पहले गृह मंत्री ने इस्तीफा दिया, उसके बाद प्रधानमंत्री ओली ने पद छोड़ा और सोमवार देर रात राष्ट्रपति ने भी अपने पद से हटने का ऐलान कर दिया। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि “जनता के विश्वास और लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोपरि रखते हुए, राष्ट्रपति ने इस्तीफा देने का निर्णय लिया है।”
अब नेपाल की राजनीति में संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है। सवाल यह है कि शीर्ष पदों के खाली होने के बाद अगली सरकार और नए नेतृत्व का चुनाव किस तरह होगा। विपक्षी दल और युवा संगठनों ने इसे “जनशक्ति की ऐतिहासिक जीत” बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नेपाल के इतिहास का वह दौर है जब युवा शक्ति ने सरकार को घुटनों पर ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में नेपाल की राजनीति का भविष्य इन्हीं युवाओं की अपेक्षाओं और निर्णयों पर निर्भर करेगा।
