नई दिल्ली। वक्फ संपत्तियों को लेकर चल रहे विवादों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने वक्फ बोर्ड से जुड़ी उस शर्त पर रोक लगा दी है, जिसमें किसी व्यक्ति को वक्फ की संपत्ति का हिस्सा पाने या उससे जुड़े अधिकार हासिल करने के लिए कम से कम पांच साल तक इस्लाम का पालन करना आवश्यक बताया गया था।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी धर्म के पालन को बाध्यकारी शर्त बनाना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। अदालत ने साफ किया कि वक्फ कानून के तहत दी गई इस शर्त का अब पालन नहीं किया जाएगा, जब तक कि मामले पर अंतिम सुनवाई पूरी नहीं हो जाती।
याचिका में क्या था मामला?
कई याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि वक्फ से जुड़ी यह शर्त धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकार के खिलाफ है। याचिका में कहा गया कि पांच साल तक किसी धर्म का पालन करने की बाध्यता असंवैधानिक है और यह मनमानी लगती है।
आगे की प्रक्रिया
अदालत ने केंद्र सरकार और वक्फ बोर्ड से इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब मांगा है। अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि वक्फ अधिनियम में इस प्रावधान को स्थायी रूप से हटाया जाए या नहीं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला देशभर में वक्फ संपत्तियों और उनसे जुड़े अधिकारों पर बड़ा असर डालेगा। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का यह अंतरिम आदेश वक्फ कानून की व्याख्या और धार्मिक स्वतंत्रता की सीमा पर नई बहस को जन्म दे चुका है।
