लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में एक बार फिर बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। कभी पार्टी के नेशनल को-ऑर्डिनेटर रहे जयप्रकाश सिंह की पार्टी में वापसी हो गई है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने दिल्ली में उनसे मुलाकात के बाद उन्हें पश्चिम बंगाल और ओडिशा का प्रभार सौंपा है।
माना जा रहा है कि यह फैसला मायावती की नई रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत पुराने और अनुभवी नेताओं को फिर से पार्टी के साथ जोड़ा जा रहा है। जयप्रकाश सिंह की वापसी को बसपा के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
हाल ही में मायावती ने अपने कई पुराने निर्णयों को पलटते हुए आकाश आनंद, अशोक सिद्धार्थ, और गिरीश चंद्र जैसे नेताओं को भी दोबारा पार्टी में जगह दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बसपा आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए अनुभवी नेताओं पर फिर से भरोसा जता रही है, ताकि संगठन में स्थिरता और मजबूती लाई जा सके।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, जयप्रकाश सिंह को पूर्व में भी पूर्वी भारत के राज्यों में संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई थी, जहां उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया था। अब उन्हें फिर से उसी क्षेत्र में जिम्मेदारी देकर पार्टी ने यह संकेत दिया है कि पुराने नेताओं पर भरोसा कायम है।
हाल के दिनों में बसपा में लगातार कई पुराने नेताओं की वापसी हुई है — धर्मवीर अशोक, एम.एल. तोमर समेत कई नेताओं को भी फिर से जोड़ा गया है। इससे यह साफ है कि बसपा अपने पुराने सहयोगियों के साथ एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत करना चाहती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परिवारवाद और गुटबाजी के कारण बसपा को बीते कुछ वर्षों में नुकसान उठाना पड़ा है। अब मायावती संगठन को फिर से खड़ा करने के लिए पुराने और निष्ठावान चेहरों पर दांव लगा रही हैं।
आगामी चुनावी माहौल में जयप्रकाश सिंह जैसे नेताओं की वापसी बसपा को नई ऊर्जा दे सकती है और पार्टी की पकड़ उन इलाकों में फिर से मजबूत कर सकती है, जहां पहले उसका जनाधार कमजोर पड़ गया था।
संक्षेप में कहा जाए तो बसपा सुप्रीमो मायावती ने पुराने नेताओं को दोबारा मौका देकर यह संकेत दिया है कि पार्टी अब सियासी संतुलन और संगठनात्मक एकजुटता की दिशा में गंभीर है। जयप्रकाश सिंह की वापसी इसी कड़ी का अहम हिस्सा मानी जा रही है।
