Bihar: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर जारी अपने एक बयान में सत्ताधारी दल एनडीए पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पहले चरण के बाद एनडीए खेमे में “गमगीन माहौल” है और हार के डर से केंद्र सरकार के कुछ बड़े मंत्री अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं।

तेजस्वी ने दावा किया कि “गृह मंत्रालय के इशारे पर प्रशासनिक अधिकारियों को देर रात तक बुलाया जा रहा है, होटल के सीसीटीवी बंद कराए जा रहे हैं, और महागठबंधन समर्थित बूथों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।”

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आवास से “कुछ भ्रष्ट अधिकारियों” के जरिए पुलिस को निर्देश दिए जा रहे हैं कि मतदान से पहले विपक्षी कार्यकर्ताओं को डिटेन किया जाए। तेजस्वी ने बिहार के ईमानदार अधिकारियों से अपील की कि वे “रिटायर्ड अधिकारियों या राजनीतिक दबाव में आए बिना संविधान के तहत अपने कर्तव्यों का पालन करें।”

जनता को चेतावनी

तेजस्वी यादव ने अपने बयान में कहा,“दो गुजराती किसी भी तरह बिहार पर कब्जा करना चाहते हैं। वे बिहार को अपना उपनिवेश बनाना चाहते हैं। लेकिन बिहार की जनता लोकतंत्र की डकैती नहीं होने देगी।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि जनता “वोट चोरी और चुनावी गड़बड़ी” को रोकने के लिए पूरी तरह तैयार है।

राजनीतिक हलचल तेज

तेजस्वी के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई हलचल मच गई है। एनडीए नेताओं ने इसे “राजनीतिक ड्रामा” बताया और कहा कि महागठबंधन अपनी संभावित हार से घबराया हुआ है। वहीं, राजद प्रवक्ताओं का कहना है कि तेजस्वी का बयान “जनता की आवाज” है और विपक्ष को डराने-धमकाने की कोशिशें अब सामने आ रही हैं।

चुनाव आयोग ने भी इस पूरे मामले पर नजर बनाए रखने की बात कही है। सूत्रों के अनुसार, राज्य के कई जिलों में चुनावी पर्यवेक्षकों को अतिरिक्त सतर्कता के निर्देश दिए गए हैं।

मतदान और माहौल

पहले चरण के मतदान में राज्य के कई जिलों में रिकॉर्ड वोटिंग दर्ज की गई है। मतदाताओं में बेरोजगारी, महंगाई और स्थानीय मुद्दों को लेकर गुस्सा साफ दिखाई दिया। दूसरे चरण के मतदान से पहले दोनों खेमों ने प्रचार-प्रसार की रफ्तार तेज कर दी है।

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