Lucknow: राजधानी लखनऊ में एक बार फिर जानलेवा कारोबार का पर्दाफाश हुआ है। यूपी एसटीएफ ने रविवार को गोमतीनगर क्षेत्र के विजय खंड-1 स्थित एक मकान में छापेमारी कर अवैध रूप से ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन तैयार करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया। टीम ने मौके से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में जहरीले केमिकल और पैकिंग सामग्री बरामद की है।

गौसुल हसन के मकान से चल रहा था ‘जहर का धंधा’

एसटीएफ की डिप्टी एसपी दीपक कुमार सिंह की अगुवाई में की गई छापेमारी में खुलासा हुआ कि गोमतीनगर थाने से कुछ ही दूरी पर स्थित उजरियांव गांव में गौसुल हसन के मकान को गिरोह ने केमिकल लैब बना रखा था। यहां अवैध रूप से ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन तैयार कर लखनऊ सहित आसपास के जिलों में सप्लाई की जाती थी।

दो आरोपी गिरफ्तार, भारी मात्रा में सामान बरामद

एसटीएफ ने अलीगंज के त्रिवेणी नगर निवासी कय्यूम अली और मड़ियांव के मोहम्मद इब्राहिम को गिरफ्तार किया है।

उनके पास से जब्त सामग्री में शामिल हैं —

70 लीटर ऑक्सीटोसिन (14 गैलन)

55 लीटर फिनायल

27 लीटर सिरका (विनेगर)

16,500 खाली शीशियां

9 कैप सीलर मशीनें

हजारों एल्यूमिनियम कैप और रबर पैक

पकड़े गए आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे बिहार और गाजियाबाद से ऑक्सीटोसिन पाउडर व पैकिंग सामग्री मंगाकर अपने हिसाब से तैयार एम्पुल में भरते थे और फिर विभिन्न जिलों में सप्लाई करते थे।

जानवरों से लेकर इंसानों तक पर असर

एक वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि ऑक्सीटोसिन एक खतरनाक हार्मोनल इंजेक्शन है, जिसे अधिक मात्रा में देने से दूध देने वाले जानवरों की सेहत बिगड़ जाती है। इंसानों में इसका उपयोग गलत तरीके से करने पर जानलेवा साबित हो सकता है।इससे शरीर के अंगों पर गंभीर असर पड़ता है और कई बार जान भी चली जाती है।

स्थानीय पुलिस की भूमिका पर सवाल

एसटीएफ की कार्रवाई ने स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। गोमतीनगर थाना क्षेत्र में इतने बड़े स्तर पर खतरनाक इंजेक्शन तैयार किए जा रहे थे, लेकिन थाने को भनक तक नहीं लगी।एसटीएफ और औषधि विभाग की संयुक्त कार्रवाई ने न केवल इस गोरखधंधे का पर्दाफाश किया, बल्कि एक बार फिर राजधानी में अवैध दवाओं के नेटवर्क की गहराई को भी उजागर कर दिया है।

पुराने मामलों की याद दिलाता है यह खुलासा

यह घटना कोई पहली नहीं है। लखनऊ पहले भी खून बेचने वाले रैकेट और किडनी कांड जैसे मामलों से सुर्खियों में रहा है।

अब एक बार फिर ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन तस्करी ने प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसटीएफ की यह कार्रवाई भले ही बड़ी सफलता मानी जा रही हो, लेकिन यह भी साफ है कि राजधानी में जानलेवा कारोबार की जड़ें अब भी गहरी हैं।

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