लखनऊ: यूपी एसटीएफ ने तकनीक का इस्तेमाल अपराध के लिए कर बहराइच–नेपाल बॉर्डर पर लंबे समय से सक्रिय फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले संगठित गिरोह का खुलासा करते हुए गोरखधंधे के मास्टरमाइंड प्रमोद कुमार निषाद को शुक्रवार तड़के धर दबोचा।यह गिरफ्तारी सुबह करीब 4:30 बजे नेपाल सीमा के रजनवा बॉर्डर पर दबिश देकर की गई। इस गिरफ्तारी से यूपी एसटीएफ नें सम्पूर्ण रैकेट की कमर तोड़ कर रख दी है।
28 वर्षीय प्रमोद निषाद बीएससी की पढ़ाई करने के बाद जनसेवा केंद्र खोलकर सामान्य लोगों की सेवा करने का दावा कर रहा था,लेकिन वह डिजिटल अपराध की दुनिया में उतरकर सरकारी दस्तावेजों को खिलौने की तरह इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।यूपी एसटीएफ ने उसके कब्जे से लैपटॉप, बायोमैट्रिक स्कैनर, रेटिना स्कैनर, वेबकैम, दो मोबाइल फोन, दो एटीएम कार्ड, एक चेकबुक, एक आधार कार्ड, 87 स्क्रीनशॉट और दस्तावेजों की प्रतियां तथा हुंडई वरना कार समेत नकदी भी बरामद की है। बतादे कि मुर्तिहा थाना क्षेत्र में 29 अक्टूबर को एक मुकदमा दर्ज हुआ, जिसमें बताया गया था कि एक संगठित गिरोह पोर्टल के जरिए डिजिटल रूप से कूटरचित जन्म व निवास प्रमाण पत्र बनाकर फर्जी आधार कार्ड तैयार कर रहा है। गिरोह के चार सदस्य—सोनू सिंह, अखंड प्रताप सिंह, नफीस अली और रामनिवास गुप्ता—की गिरफ्तारी के बाद खुलासा हुआ कि असली सूत्रधार प्रमोद निषाद है, जो पोर्टल और आधार बनाने की यूजर आईडी व पासवर्ड मुहैया कराता था।
एसटीएफ ने तकनीकी विश्लेषण के बाद जब जाल बिछाया, तो पता चला कि प्रमोद ने दर्जनों लोगों के सिस्टम पर एनीडेस्क के जरिए अवैध पोर्टल डाउनलोड कराकर आईडी–पासवर्ड सेव किए थे। वह प्रत्येक आईडी के बदले 45 हजार रुपये वसूलता था, जबकि उसके सहयोगी अकील सैफी को 35 हजार रुपये भेजता था। इस अवैध धंधे का दायरा इतना बड़ा था कि सिर्फ तीन महीनों (जनवरी 2025 से मार्च 2025) के भीतर इस रैकेट ने करीब 2000 से 2500 फर्जी आधार कार्ड तैयार कर डाले। पूरे नेटवर्क के जरिए कुल 18 से 19 हजार आधार अपडेट और नए कार्ड बनाए जाने का अनुमान है।
पूछताछ में प्रमोद ने बताया कि 2021 में उसने जनसेवा केंद्र के लिए ट्रेनिंग ली और 2022 में कंप्यूटर सेंटर खोला। लेकिन धीरे-धीरे अपराध की दुनिया में उतरते हुए वह सरकारी पोर्टलों से छेड़छाड़ करने में महारत हासिल कर गया। उसने जन्म व निवास प्रमाण पत्र के नकली डिजिटल पीडीएफ बनाने का तरीका सीख लिया और 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों के फर्जी आधार में भी संशोधन करवाने लगा। गिरफ्तारी के डर से वह काफी समय से छिपा हुआ था और नेपाल भागने की फिराक में था।एसटीएफ अब इस पूरे रैकेट के आर्थिक लेन-देन, संबंधित बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट की छानबीन कर रही है। साथ ही, इस अवैध पोर्टल को डेवलप करने वाले व्यक्तियों व गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए भी दबिशें दी जा रही हैं।
जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। प्रमोद के खिलाफ मुर्तिहा थाने में दर्ज मुकदमे में बीएनएस 2023 की कई गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई तेज कर दी गई है। यह मामला न सिर्फ साइबर अपराध की भयावहता उजागर करता है, बल्कि इस बात की भी चेतावनी देता है कि डिजिटल पहचान के दौर में दस्तावेज सिर्फ कागज नहीं,बल्कि उनकी सुरक्षा आवश्यक है।
