रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को रामपुर जिला जेल से पैरोल पर छोड़े जाने की मांग की गई है। यह मांग आजम खान की भाभी के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए की गई है, लेकिन अब तक जिला प्रशासन की ओर से इस पर कोई स्पष्ट निर्णय या आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है।

भाभी के निधन के बाद पैरोल की अर्जी

आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान इस समय सात साल की सजा काटते हुए रामपुर जेल में बंद हैं। इसी दौरान आजम खान के बड़े भाई, सेवानिवृत्त चीफ इंजीनियर मोहम्मद शरीफ खान की पत्नी का निधन हो गया। मृतका आजम खान की सगी भाभी और अब्दुल्ला आजम की सगी ताई थीं।

परिवार की ओर से इच्छा जताई गई कि दोनों अंतिम संस्कार में शामिल हो सकें। इसी उद्देश्य से जिलाधिकारी रामपुर को पैरोल के लिए आवेदन दिया गया।

केवल 4 घंटे की मांगी गई पैरोल

यह आवेदन आजम खान के भांजे फरहान खान की ओर से लगाया गया, जिसे उनके अधिवक्ता और रामपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सतनाम सिंह मट्टू ने प्रस्तुत किया।
दरखास्त में साफ किया गया कि—

  • पैरोल केवल चार घंटे के लिए मांगी गई है

  • समय: दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक

  • पुलिस निगरानी में अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति

  • इसके बाद दोनों को वापस जेल भेजे जाने की व्यवस्था

अधिवक्ता ने इसे परिवार से जुड़ा मानवीय और संवैधानिक अधिकार बताया है।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

अधिवक्ता सतनाम सिंह मट्टू के अनुसार, आवेदन मिलने के बाद जिलाधिकारी रामपुर ने यह कहा था कि इस पर प्रयास किया जाएगा। हालांकि, इसके बाद न तो कोई लिखित आदेश जारी किया गया और न ही कोई स्पष्ट सूचना दी गई।
उन्होंने बताया कि बाद में संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन कॉल्स का भी कोई जवाब नहीं मिला।

अखिलेश यादव ने जताई नाराज़गी

इस बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी आजम खान और अब्दुल्ला आजम के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए सत्ता पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा—“सत्ता के गुरूर में जुल्म की हदें पार की जा रही हैं।”

परिवार और समर्थकों में बढ़ी चिंता

अधिवक्ता का कहना है कि यदि पैरोल देना संभव नहीं है, तो प्रशासन को उसका स्पष्ट कारण बताना चाहिए। अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील मामले में निर्णय में देरी से परिवार को मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है। फिलहाल, सभी की निगाहें रामपुर जिला प्रशासन के फैसले पर टिकी हैं कि क्या आजम खान और उनके बेटे को अंतिम संस्कार में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी या नहीं।

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