लखनऊ। स्पेशल टास्क फोर्स नें विभिन्न राज्यों औऱ यूपी के विभिन्न जिलों में बोगस फर्मों का पंजीकरण कर फर्जी इनवाइस/ई-वे बिल के जरिये जी०एस०टी० की चोरी कर करीब पांच सौ करोड़ से अधिक की राजस्व की क्षति करने वाले अन्तर्राज्यीय गिरोह के आठ सदस्यों को एस०टी०एफ० फील्ड इकाई मेरठ कार्यालय में पूछताछ के दौरान गिरफ्तार किया है।

पकड़े गये आरोपी दिलशाद मलिक निवासी-828/27 न्यू इस्लाम नगर थाना लोहिया नगर मेरठ मूलनिवासी ओखलेना कल्यानपुर मेरठ व रमेश पटेल स्थायी पता-ग्राम मरवटिया उपाध्याय पोस्ट भलुवनी जनपद देवरिया वर्तमान पता-बी-1/260 न्यू अशोक नगर दिल्ली व अंकुर तिवारी निवासी 4445, सत्तीसाईपुरम कॉलोनी, छपरौला, गौतमबुद्धनगर, उ०प्र० मूल निवासी ग्राम आदमपुर, पोस्ट जहाँगीरगंज, बाना जहाँगीरगंज, अम्बेडकनगर व स्वतंत्र कुमार तिवारी निवासी डी 155बी, पटेलनगर, गाजियाबाद मूल निवासी ग्राम आदमपुर, पोस्ट जहाँगीरगंज थाना जहाँगीरगंज, अम्बेडकनगर व मो० वसीम पुत्र जहीर अहमद नि0-90 गली न-4 करीम नगर थाना नौचन्दी मेरठ व
मो० सोहेल निवासी 45 जैद गार्डेन कालोनी थाना लिसाड़ीगेट जनपद मेरठ व जावेद मलिक निवासी -227 न्यू इस्लाम नगर गली न०-35 थाना लोहियानगर जनपद मेरठ व इकरामुददीन पुत्र अलीशेर निवासी -736 जैदी नगर सोसायटी थाना गौचन्दी मेरठ के पास से नब्बे विभिन्न फर्मों की कूटरचित मोहर व 18 मोबाइल फोन व 54 विभिन्न बैंकों की चेकबुक व सात पैन कार्ड व चार वोटर कार्ड व पांच विभिन्न ट्रान्सपोर्ट कम्पनी की फर्जी बिल-बुक व 54 डेबिट/केडिट कार्य व 02 सिम कार्ड व 03 लैपटाप औऱ दो मोहर की डाई व पांच आधार कार्ड व 25 विभिन्न फर्मों की बिलिंग फाईल व चार वाहन चार पहिया व नकद 3,320 रुपये बरामद किया है।एस०टी०एफ० के पुलिस उपाधीक्षक प्रमेश कुमार शुक्ल नें बताया कि पकड़ा गया दिलशाद मलिक द्वारा राणा एसोसिएट देविका चेम्बर आर०डी०सी० में एकाउण्टेसी सम्बन्धी कार्यों को किया जाता है, जहाँ पर सुहैल, वसीम अंकुर तिवारी, स्वतत्र तिवारी, रमेश व जावेद कार्य करते है।

दिलशाद मलिक द्वारा अपने इन्ही सहयोगियों के साथ मिलकर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर बोगस फर्म बनाना, बिना किसी परचेज के बोगस सेल्स इनवाईस काटना, बोगस ई-वे बिल तैयार कर जीएसटी पोर्टल पर अपलोड करना एवं फर्जी जी०एस०टी० रिटर्न फाईल करने सम्बन्धी कार्य किया जाता है।यह कार्य दिलशाद द्वारा स्वयं की एवं अन्य विभिन्न वास्तविक फर्मों को लाभ पहुँचाने हेतु किया जाता है।उन्होंने बताया कि वास्तविक फर्म धारक अपना जी०एस०टी० नम्बर, माल/ सेवा की किस्म, मात्रा, कीमत का विवरण दिलशाद को व्हाट्सएप के माध्यम से भेजता था, जिस पर वह अपने कर्मियों सुहल, वसीम, अंकुर तिवारी, स्वतंत्र तिवारी, रमेश व जावेद के माध्यम से पूर्व में बनायी गयी बोगस फर्मों के सेल्स इनवाईस, ई-वे बिल आदि विवरण जी०एस०टी० पोर्टल पर अपलोड कराकर विवरण सम्बन्धित वास्तविक फर्म धारको को उपलब्ध करा दिया जाता था। इन बोगस इनवाईसेज में अक्तिरिक्त माल सेवा की फर्जी परचेज को वास्तविक रूप देने के लिए सम्बन्धित फर्मों द्वारा बैंक खातों के माध्यम से सेल्स इनवाइस में अंकित रकम बोगस फर्म के खाते में ट्रांसफर दिखाई जाती है।इस लेन-देन से सम्बन्धित धनराशि की पूर्ति बोगस फर्मों से कैश के माध्यम अथवा अन्य बोगस फर्मों से सकुर्लर ट्रेडिंग दिखाकर कर वास्तविक फर्म धारक कर लेता है। बैंक ट्रान्जेक्शन हेतु विभिन्न फर्मों के लागिन आई०डी०, पासवर्ड की एक्सेज अभियुक्तों के पास रहती है जिससे वह सम्बन्धित फर्मों से ओ०टी०पी० प्राप्त कर सुविधाजनक ढंग से लेन-देन करता रहता है।आरोपियों नें लखनऊ में भी फर्जी प्रपत्रों के आधार 6 बोगस फार्मे हर्ष ट्रेडर्स, इन्दर इन्टरप्राइजेज, आर०के० इष्टरप्राइ‌जेज, राहुल इन्टरप्राइजेज, मार्शल इम्पेक्च एवं कुमार ट्रेडर्स पंजीकृत करायी गयी थी। जिनके माध्यम से सर्कुलर ट्रेडिंग करते हुए स्वय की एवं अन्य वास्तविक कमों को लाम पहुँचाते हुए करोडो रूपये की जीएसटी चोरी कर राजस्व क्षति की गयी है।

पकड़े गये आरोपियों नें तमिलनाडू, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक, आन्ध्रप्रदेश, नई दिल्ली, झारखण्ड, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार आसान आदि राज्यों के पते पर कई बोगस फर्म पंजीकृत कराकर उनके माध्यम से जीएसटी चोरी कर राजस्व को क्षति पहुंचा रहे थे।यूपी के विभिन्न जनपदों मेरठ, हापुड़, गायिजाबाद, वाराणसी, नोएडा, कानपुर, लखनऊ, आगरा आदि के पत्तों पर भी कई बोगत्त फर्ने पंजीकृत करायी गयी थी।इसी तरह से आगरा जिले में दो फर्म पंजीकृत कराई गई थी,जिसमें शर्मा इन्टरप्राइजेज नाम की फर्म भी है जिसके द्वारा अकेले 137 करोड़ रूपये की राजस्व क्षति की गयी है।आरोपियों के मोबाइल फोन में 50 से अधिक ई-मेल आई०डी० लागिन थी जिनके माध्यम से बोगस फर्मों का पंजीकरण, फर्जी इनवाईस एवं ई-वे बिल काटने, जी०एस०टी० रिटर्न फाइलिंग एवं बैंक ट्रांजेक्शन सम्बन्धी ओ०टी०पी० प्राप्त किया जाता था। मोबाइल फोन में उपलब्ध बैंक ट्रान्जेक्शन के अवलोकन से बोगस फर्मों के माध्यम से आरोपियों द्वारा प्रथम दृष्टया लगभग 500 करोड़ से अधिक धनराशि की जीएसटी चोरी कर राजस्व क्षति की है।

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