लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर उनके विचारों और संदेशों को याद करते हुए कहा कि ‘विवेकानंद’ नाम स्वयं में आत्मा और चेतना के स्तर पर सबसे बड़ा संदेश देता है। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का आह्वान था— ‘विवेक’ की गहराई तक पहुंचकर ‘आनंद’ की अवस्था का अनुभव करना।

 आंतरिक स्वतंत्रता से ही जन्म लेता है सच्चा विवेक

अखिलेश यादव ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का संदेश व्यक्ति को अपनी आंतरिक स्वतंत्रता को पहचानने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि सच्चा विवेक तभी संभव है जब इंसान मानसिक रूप से किसी दूसरे के प्रभाव, दबाव या भय से मुक्त हो। उनके अनुसार, विवेकानंद का दर्शन हमें स्वतंत्र रूप से सोचने और निर्णय लेने का साहस देता है।

अखिलेश यादव ने कहा कि विवेकानंद का यह संदेश लोगों को स्वयं सोचने और निर्णय लेने की प्रेरणा देता है। यह हमें बाहरी दिखावटी और छद्म गतिविधियों के पीछे छिपे ढोंग, पाखंड, मिथ्याचार और स्वार्थ को पहचानने में मदद करता है। उनका यह कालजयी विचार हर युग में प्रासंगिक रहा है और आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

 मानवता और भाईचारे का दिया संदेश

इस अवसर पर अखिलेश यादव ने स्वामी विवेकानंद की मानवता के प्रति गहरी संवेदनशीलता और विश्व भाईचारे की भावना को स्मरण करते हुए उन्हें कोटि-कोटि नमन किया। उन्होंने कहा कि विवेकानंद का सपना था—एक ऐसा विश्व जहां मानव-मानव के बीच भेदभाव नहीं हो।

 युवाओं से विशेष आह्वान

अखिलेश यादव ने लोगों, विशेषकर युवाओं से आह्वान किया कि वे बाहरी दिखावे और केवल पुस्तकीय ज्ञान पर निर्भर न रहें, बल्कि अपने भीतर के विवेक और बोध को जीवन का मार्गदर्शक बनाएं। उन्होंने कहा “विवेकशील बनें। वाह्य ज्ञान नहीं, बल्कि अपने भीतर के विवेक और बोध को प्रकाश स्तंभ बनाएं।”

आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं विवेकानंद

अखिलेश यादव ने विश्वास जताया कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी युवाओं को सशक्त बनाने, सही दिशा देने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखते हैं। उनका संदेश स्वतंत्र सोच, आत्मचेतना और मानवता के मूल्यों को हमेशा उजागर करता रहेगा।

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