माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के पावन स्नान को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। इस अवसर पर ज्योतिषपीठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। आरोप है कि अव्यवस्थाओं और पुलिस-प्रशासन के रवैये के कारण शंकराचार्य पवित्र स्नान नहीं कर सके। घटना से नाराज स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। मामले ने देखते ही देखते तूल पकड़ लिया और माघ मेले की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे।
प्रशासन पर गंभीर आरोप
शंकराचार्य के समर्थकों का कहना है कि मौनी अमावस्या जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर भी व्यवस्थाएं पूरी तरह विफल रहीं। उनका आरोप है कि पुलिस ने श्रद्धालुओं और संतों के साथ कठोर रवैया अपनाया, जिससे हालात बिगड़ गए। वहीं प्रशासन की ओर से स्थिति नियंत्रित करने की बात कही जा रही है, लेकिन धरने और विरोध के चलते मामला और संवेदनशील हो गया है।
विवादों से पुराना नाता
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का नाम इससे पहले भी कई विवादों में सामने आता रहा है। अयोध्या में राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के दौरान उन्होंने आमंत्रण मिलने के बावजूद इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया था, जिसे लेकर देशभर में चर्चा हुई थी।
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में हुआ जन्म
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले की पट्टी तहसील स्थित ब्राह्मणपुर गांव में हुआ था। दीक्षा से पहले उनका नाम उमाशंकर उपाध्याय था। उन्होंने वर्ष 2006 में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से दीक्षा ग्रहण की। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री और आचार्य की उपाधि प्राप्त की है। धार्मिक जीवन के साथ-साथ वे छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं और 1994 में छात्रसंघ चुनाव जीतकर राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी।
राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर मुखर
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने तीखे और बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने केदारनाथ धाम से 228 किलोग्राम सोना गायब होने का आरोप लगाकर सनसनी फैला दी थी। इसके अलावा वर्ष 2008 में गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित कराने की मांग को लेकर उन्होंने अनशन भी किया था। राजनीतिक रूप से भी वे सक्रिय रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ समर्थित उम्मीदवार उतारकर उन्होंने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी थीं, हालांकि चुनावी सफलता नहीं मिली।
फिर चर्चा में शंकराचार्य
मौजूदा माघ मेला विवाद के बाद एक बार फिर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई और इस विवाद के समाधान पर टिकी हुई है।
