UP: Lucknow नगर निगम शहर में कचरा प्रबंधन को मजबूत करने और स्वच्छता रैंकिंग में सुधार के उद्देश्य से एक बार फिर कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट लगाने की योजना पर काम कर रहा है। इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 21 फरवरी को नगर निगम सदन की विशेष बैठक बुलाई गई है। बैठक में पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत निजी कंपनी के चयन और जमीन आवंटन से जुड़े नियमों को तय किया जाएगा।

महापौर सुषमा खर्कवाल ने बताया कि प्रस्तावित प्लांट पूरी तरह पीपीपी मॉडल पर आधारित होगा और नगर निगम को इस परियोजना पर प्रत्यक्ष वित्तीय खर्च नहीं करना पड़ेगा। कंपनी के लिए शर्तें, भूमि का आकार और अन्य प्रावधानों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इस पर पार्षदों से सुझाव भी लिए जाएंगे, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर में निकलने वाले कचरे की प्रकृति बदल चुकी है। प्लास्टिक और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे की मात्रा बढ़ी है, जिसका निस्तारण चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। फिलहाल ऐसे कचरे से आरडीएफ (Refuse Derived Fuel) तैयार कर उसे दूसरे राज्यों की सीमेंट फैक्ट्रियों में भेजा जाता है, जिससे अतिरिक्त खर्च होता है। यदि शहर में ही कूड़े से बिजली का उत्पादन शुरू होता है तो कचरे का स्थानीय स्तर पर निपटान संभव होगा और आय का स्रोत भी बनेगा।

हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब नगर निगम इस दिशा में कदम बढ़ा रहा है। करीब दो दशक पहले हरदोई रोड स्थित बरावन खुर्द क्षेत्र में एक निजी कंपनी द्वारा कूड़े से बिजली उत्पादन का प्लांट स्थापित किया गया था। उस परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन प्लांट अपेक्षित परिणाम नहीं दे सका और उत्पादन शुरू नहीं हो पाया। बाद में कंपनी और वित्तीय विवादों के चलते परियोजना ठप हो गई और जमीन भी लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी है। नई योजना को लेकर नगर निगम का दावा है कि इस बार पूर्व की कमियों को ध्यान में रखते हुए सख्त शर्तें और निगरानी व्यवस्था तय की जाएगी, ताकि परियोजना सफलतापूर्वक संचालित हो सके। अब देखना होगा कि सदन की बैठक में प्रस्ताव को किस रूप में मंजूरी मिलती है और शहर में कचरा प्रबंधन की दिशा में यह पहल कितनी कारगर साबित होती है।

admin

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *