काठमांडू: नेपाल में 5 मार्च को प्रस्तावित आम चुनाव से पहले भारत से सटे चार प्रांत—सुदूर पश्चिम, लुंबिनी, मधेश और कोशी—में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। हाल के सप्ताहों में बीरगंज और रौतहट में हुई हिंसक घटनाओं के बाद मतों के ध्रुवीकरण और बाहरी हस्तक्षेप की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, दंगों से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक संकेतों में विदेशी तत्वों की संभावित भूमिका की पड़ताल की जा रही है, हालांकि आधिकारिक स्तर पर किसी निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की गई है। नेपाल पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी संगठन या बाहरी प्रभाव के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी।

बीरगंज और रौतहट में तनाव के बाद सख्ती

फरवरी में बीरगंज और रौतहट के गौर क्षेत्र में तनावपूर्ण घटनाएं सामने आई थीं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कर्फ्यू और निषेधाज्ञा लागू की गई। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भड़काऊ सामग्री की निगरानी बढ़ाई गई है।

सीमा क्षेत्रों में बढ़ाई गई निगरानी

भारत-नेपाल की खुली सीमा को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां विशेष सतर्कता बरत रही हैं। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम से सटे नेपाली जिलों में संयुक्त निगरानी बढ़ाई गई है। सीमावर्ती भारतीय जिलों में भी पुलिस और सशस्त्र सीमा बल (SSB) को चौकसी के निर्देश दिए गए हैं।अधिकारियों का कहना है कि चुनाव अवधि के दौरान सीमा पर आवाजाही पर कड़ी नजर रखी जाएगी। आवश्यक होने पर अस्थायी प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं, ताकि किसी प्रकार की अवांछित गतिविधि को रोका जा सके।

जनसांख्यिकीय और राजनीतिक संदर्भ

नेपाल की हालिया जनगणना के अनुसार, कुछ सीमावर्ती जिलों में मुस्लिम आबादी का अनुपात बढ़ा है। मधेश और लुंबिनी जैसे क्षेत्रों में सामाजिक और राजनीतिक समीकरण अक्सर भारत से जुड़े सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों से प्रभावित होते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे क्षेत्रों में चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिशें अधिक संवेदनशील हो सकती हैं।

डिजिटल निगरानी पर जोर

नेपाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित भड़काऊ संदेशों और संदिग्ध ऑनलाइन नेटवर्क की जांच की जा रही है। एजेंसियों का उद्देश्य है कि अफवाहों और गलत सूचनाओं को समय रहते रोका जाए। नेपाल सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने नागरिकों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुरक्षित और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराना प्राथमिकता है। चुनाव से पहले उत्पन्न तनाव के बावजूद दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां समन्वय में काम कर रही हैं, ताकि सीमा पार शांति और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

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