बिजली संकट: प्रदेश में आने वाली गर्मियों के दौरान बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर स्थिति पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है। परिषद का कहना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो कई जिलों में आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि विभाग में लागू की गई ‘वर्टिकल व्यवस्था’ के कारण कई शहरों में उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका दावा है कि मार्च के पहले सप्ताह से ही कुछ क्षेत्रों में ट्रिपिंग, लो-वोल्टेज और शिकायतों के निस्तारण में देरी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
पीक डिमांड बढ़ने का अनुमान
परिषद के अनुसार, इस बार गर्मियों में बिजली की अधिकतम मांग 32,000 से 33,000 मेगावाट तक पहुंच सकती है। प्रदेश में लगभग 3.7 करोड़ उपभोक्ता हैं और कुल स्वीकृत भार उपलब्ध क्षमता की तुलना में काफी अधिक बताया जा रहा है। ऐसे में मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
हेल्पलाइन और सुरक्षा पर सवाल
परिषद ने 1912 हेल्पलाइन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शिकायतों का समयबद्ध समाधान नहीं हो पा रहा है। साथ ही विद्युत दुर्घटनाओं में वृद्धि को लेकर भी चिंता जताई गई है। परिषद ने सुझाव दिया है कि प्रयोगात्मक बदलावों के बजाय उपभोक्ता-केंद्रित और व्यावहारिक व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए। परिषद ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि ग्रीष्मकाल शुरू होने से पहले बिजली व्यवस्था की वास्तविक स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जाएं। साथ ही, यदि लापरवाही के कारण आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। बढ़ती गर्मी और संभावित उच्च मांग को देखते हुए ऊर्जा विभाग के सामने व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।
