शंकराचार्य: Swami Avimukteshwarananda Saraswati ने कहा है कि किसी भी राजनीतिक दल के लिए उनका “इस्तेमाल” करना संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी पार्टी का समर्थन करना नहीं बल्कि गंगा संरक्षण और गो-रक्षा जैसे धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर काम करना है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इन मुद्दों पर समर्थन देना हो तो भाजपा भी उनके साथ आ सकती है।
लखनऊ के हासेमऊ क्षेत्र स्थित एक गोशाला में आयोजित कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य ने गो-पूजन किया और गो-रक्षा को लेकर जनजागरण अभियान शुरू करने की घोषणा की। इस मौके पर उन्होंने “चतुरंगिणी सेना” बनाने का भी ऐलान किया, जो गायों की सुरक्षा और जागरूकता के लिए काम करेगी। उनके अनुसार इस सेना की ताकत चार आधारों पर टिकी होगी—बुद्धि का बल, बाहुबल, धनबल और समर्पित सहयोगियों का बल। इसमें साधु-संतों के साथ आम लोग भी शामिल हो सकेंगे। शंकराचार्य ने कहा कि जो लोग गायों को नुकसान पहुंचाते हैं या उनके साथ होने वाले अत्याचार पर चुप रहते हैं, वे धर्म के विरुद्ध कार्य कर रहे हैं। उन्होंने प्रदेश की सरकारी गोशालाओं में गायों की स्थिति पर भी चिंता जताई और कहा कि गो-सेवा केवल घोषणाओं से नहीं बल्कि ठोस व्यवस्था से होनी चाहिए।
इस बीच Akhilesh Yadav ने लखनऊ में शंकराचार्य से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। करीब एक घंटे तक चली इस बातचीत में कई सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले संत-महात्माओं का आशीर्वाद लेना भारतीय परंपरा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि शंकराचार्य के आशीर्वाद से “नकली संतों का पर्दाफाश होगा” और धर्म के नाम पर लोगों को गुमराह करने वालों की सच्चाई सामने आएगी। अखिलेश यादव ने गो-संरक्षण को लेकर अपनी सरकार के समय किए गए कार्यों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कन्नौज में देशी गाय के दूध से उत्पाद बनाने के लिए एक डेयरी प्लांट स्थापित किया गया था, जिसका उद्देश्य गौ-सेवा के साथ किसानों की आय बढ़ाना था।
मुलाकात के दौरान कई अन्य राजनीतिक और सामाजिक लोग भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में विशेष बच्चों का एक समूह भी अपने शिक्षकों के साथ शंकराचार्य से मिलने पहुंचा और उनका आशीर्वाद लिया। राजनीतिक हलकों में इस मुलाकात को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आगामी चुनावों से पहले संत-समाज और राजनीतिक दलों के बीच संवाद लगातार बढ़ रहा है। हालांकि शंकराचार्य ने साफ कहा कि वे किसी दल के लिए नहीं बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों के लिए काम कर रहे हैं।
