Lucknow Equality Conference: उच्च शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव की बढ़ती घटनाओं को लेकर राजधानी में सोमवार को एक समता सम्मेलन आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम All India Forum for Equity की ओर से यूपी प्रेस क्लब में आयोजित किया गया, जिसमें विश्वविद्यालयों में समानता सुनिश्चित करने के लिए सख्त UGC इक्विटी रेगुलेशन लागू करने की मांग उठाई गई। सम्मेलन का संचालन शांतम निधि ने किया।

सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि देश के कई विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव की घटनाएं सामने आती रही हैं। हालिया आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि पिछले कुछ वर्षों में इस तरह की शिकायतों में करीब 118 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वक्ताओं के मुताबिक यह स्थिति दर्शाती है कि विश्वविद्यालयों में समानता और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए मजबूत और जवाबदेह संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता है।
University of Lucknow के प्रोफेसर डॉ. रविकांत चंदन ने कहा कि भारतीय विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव एक गंभीर संरचनात्मक समस्या के रूप में मौजूद है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक इन घटनाओं को व्यक्तिगत मामलों के रूप में देखा गया, जबकि असल में यह संस्थागत असमानताओं का परिणाम है। ऐसे में विश्वविद्यालयों में प्रभावी नियम और स्वतंत्र निगरानी तंत्र जरूरी है। वहीं All India Students’ Association की केंद्रीय अध्यक्ष नेहा ने कहा कि कई विश्वविद्यालयों में दलित, बहुजन और वंचित समुदायों के छात्रों को अपमान और अलगाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कई बार यह दबाव छात्रों को बेहद गंभीर मानसिक स्थिति तक पहुंचा देता है। ऐसे में कैंपस में मजबूत एंटी-डिस्क्रिमिनेशन व्यवस्था जरूरी है।

राजनीतिक टिप्पणीकार डॉ. मेडुसा ने कहा कि उच्च शिक्षा का संकट केवल संसाधनों की कमी का नहीं बल्कि न्याय और समानता से भी जुड़ा हुआ है। यदि विश्वविद्यालयों में जातीय भेदभाव को नजरअंदाज किया जाएगा तो यह संवैधानिक मूल्यों के विपरीत होगा। Rihai Manch से जुड़े राजीव यादव ने कहा कि शिक्षा संस्थानों की जिम्मेदारी केवल ज्ञान देना नहीं बल्कि समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों को मजबूत करना भी है। यदि विश्वविद्यालयों में ही भेदभाव की घटनाओं को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा तो इसका असर पूरे समाज पर पड़ेगा।
सम्मेलन में वक्ताओं ने यह भी मांग की कि विश्वविद्यालयों में स्वतंत्र और पारदर्शी एंटी-डिस्क्रिमिनेशन तंत्र, समयबद्ध शिकायत निवारण प्रणाली और नियमित सामाजिक ऑडिट की व्यवस्था की जाए। उनका कहना था कि इससे छात्रों और शिक्षकों के लिए सुरक्षित और समानतापूर्ण शैक्षणिक माहौल बनाया जा सकेगा, कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों और नागरिक समाज के कई प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सभी ने विश्वविद्यालय परिसरों में समानता, गरिमा और सामाजिक न्याय को मजबूत करने के लिए इस अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प भी व्यक्त किया।
