नगराम। यदि पर्यावरण संरक्षण की एक प्रेरणादायक तस्वीर देखनी हो तो नगराम क्षेत्र के गुमनीखेड़ा गांव स्थित विद्यालय का रुख किया जा सकता है। यहां के प्रधानाध्यापक अनिल कुमार वर्मा ने अपने प्रयासों से बंजर और ऊसर पड़ी भूमि को हरे-भरे परिसर में बदल दिया है। आज विद्यालय परिसर में दर्जनों पेड़-पौधे लहलहा रहे हैं और यह स्थान पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन चुका है।

गर्मी की छुट्टियों के दौरान भी प्रधानाध्यापक अनिल कुमार वर्मा नियमित रूप से विद्यालय पहुंचकर पौधों की देखभाल में जुटे हुए हैं। शुक्रवार को उन्होंने परिसर की साफ-सफाई करने के साथ पौधों को पानी दिया और एक गुलाचीन का पौधा भी रोपा। उनका कहना है कि पौधरोपण के साथ-साथ उनका संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।

अनिल कुमार वर्मा बताते हैं कि वर्ष 2010 में जब उनकी तैनाती इस विद्यालय में हुई थी, तब परिसर की जमीन ऊसर और बंजर थी। चारों तरफ सूखी मिट्टी और धूल का वातावरण था। ऐसे में उन्होंने विद्यालय परिसर को हराभरा बनाने का संकल्प लिया और लगातार पौधारोपण, भूमि सुधार तथा पौधों के संरक्षण की दिशा में कार्य शुरू किया।

लगातार किए गए प्रयासों का परिणाम यह है कि आज विद्यालय परिसर में लगभग 80 पेड़-पौधे विकसित हो चुके हैं। इनकी छाया में विद्यार्थियों और ग्रामीणों को सुकून मिलता है, वहीं परिसर का वातावरण भी पूरी तरह प्राकृतिक और मनोहारी बन गया है। हरियाली बढ़ने से विद्यालय की सुंदरता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रधानाध्यापक ने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण देने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि प्रधानाध्यापक के प्रयासों से विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की एक प्रेरणादायक मिसाल बन गया है।

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