परिजनों के अनुसार, अजय कुमार अपनी बेटी आस्था को स्कूल से लेकर बाइक से घर लौट रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से दर्दनाक हादसा हो गया। दुर्घटना में मासूम आस्था की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अजय गंभीर रूप से घायल हो गए। उनका दाहिना हाथ बुरी तरह कुचल गया था।
घटना के बाद परिजन उन्हें इलाज के लिए विभिन्न अस्पतालों में लेकर पहुंचे। शुरुआती जांच के दौरान हाथ काटने की आशंका जताई गई। एक निजी अस्पताल में इलाज के लिए भारी खर्च का अनुमान लगाया गया, जिससे परिवार की चिंता और बढ़ गई।
बाद में अजय कुमार को मोहनलालगंज स्थित सिगमा हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। अस्पताल के संचालक डॉ. सिद्धार्थ पटेल ने बताया कि जब मरीज उनके पास पहुंचा, तब हाथ में रक्त संचार लगभग बंद हो चुका था और स्थिति अत्यंत गंभीर थी। चिकित्सकों की टीम ने चुनौती स्वीकार करते हुए करीब 20 दिनों के भीतर चार जटिल सर्जरी कीं।
लगातार उपचार और चिकित्सकीय निगरानी के बाद अजय कुमार के हाथ की स्थिति में सुधार हुआ और आखिरकार उसे बचाने में सफलता मिली। अस्पताल से छुट्टी मिलने के समय परिवार के चेहरे पर राहत दिखाई दी, हालांकि बेटी को खोने का दुख आज भी उन्हें भीतर से तोड़ देता है।
अजय कुमार का कहना है कि बेटी की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती, लेकिन हाथ बच जाने से अब वह अपने परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे। उन्होंने चिकित्सकों और अस्पताल की पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।
डॉ. सिद्धार्थ पटेल ने कहा कि किसी मरीज को स्वस्थ होकर सामान्य जीवन की ओर लौटते देखना ही चिकित्सकों के लिए सबसे बड़ी संतुष्टि होती है। उन्होंने बताया कि पूरी टीम ने समर्पण और धैर्य के साथ उपचार किया, जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आया।
