राजभर ने अपने पोस्ट में कहा कि समाजवादी पार्टी और उसके समर्थक विभिन्न घटनाओं को जातीय संघर्ष के रूप में प्रस्तुत कर समाज को बांटने का प्रयास करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में वास्तविक कारण व्यक्तिगत विवाद, जमीन संबंधी झगड़े या एक ही समुदाय के लोगों के बीच के मतभेद रहे हैं, लेकिन उन्हें राजनीतिक रूप से अलग रूप देने की कोशिश की गई।
सुभासपा प्रमुख ने दावा किया कि प्रदेश की जनता लंबे समय से इस तरह की राजनीति को देख रही है और अब लोग वास्तविकता को समझने लगे हैं। उन्होंने कई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनमें जातीय उत्पीड़न के आरोप लगाए गए, जबकि जांच या अन्य तथ्यों में अलग तस्वीर सामने आई।
ओम प्रकाश राजभर ने यह भी आरोप लगाया कि सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रामक सामग्री और कथित रूप से संपादित वीडियो प्रसारित कर राजनीतिक माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसी राजनीति समाज में विभाजन पैदा करती है और इससे लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचता है।
अपने बयान में राजभर ने समाजवादी पार्टी नेतृत्व को दोहरे राजनीतिक रवैये का आरोपित बताते हुए कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में जनता ऐसे मुद्दों पर अपना जवाब देगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जाति और वर्ग के आधार पर समाज को बांटने की राजनीति अब ज्यादा समय तक सफल नहीं हो पाएगी।
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से ओम प्रकाश राजभर और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। दोनों दलों के नेताओं के बीच सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जिससे प्रदेश की सियासत में बयानबाजी का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।
