ग्रामीणों के अनुसार गांव में स्थित गाटा संख्या 174 ड और 174 च की करीब डेढ़ बीघा जमीन राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी खाते में दर्ज है। वर्तमान समय में क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे भूमि मूल्यों के कारण इस जमीन की कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। आरोप है कि इसी बहुमूल्य भूमि पर बाउंड्रीवॉल बनाकर सड़क और अन्य विकास कार्य शुरू करा दिए गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित भूमि पर पाइपलाइन बिछाने और समतलीकरण जैसे कार्य भी कराए गए हैं, जिससे यह प्रतीत होता है कि जमीन को निजी स्वामित्व वाली संपत्ति के रूप में विकसित किया जा रहा है। जबकि ग्रामीणों का दावा है कि उक्त भूमि सार्वजनिक श्रेणी में दर्ज है।
ग्रामीणों का आरोप है कि मामले की जानकारी कई बार लेखपाल, कानूनगो और तहसील प्रशासन को दी गई, लेकिन शिकायतों के बावजूद न तो भूमि की पैमाइश कराई गई और न ही निर्माण कार्य रुकवाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया। इसको लेकर क्षेत्र में राजस्व विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।
गांव के लोगों का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर शिकायतों को गंभीरता से लिया जाता, तो स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा करने की मांग की है।
स्थानीय निवासियों का यह भी कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो सरकारी भूमि पर स्थायी निर्माण हो सकता है, जिससे भविष्य में उसे मुक्त कराना कठिन हो जाएगा। साथ ही सार्वजनिक उपयोग की भूमि और आवागमन के मार्ग प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी से मांग की है कि राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर भूमि की पैमाइश कराए, निर्माण कार्यों की स्थिति का सत्यापन करे और यदि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस संबंध में कार्यवाहक एसडीएम बृजेश वर्मा ने बताया कि सरथूवा गांव से संबंधित शिकायत प्राप्त हुई है। राजस्व अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पैमाइश कराकर पूरे मामले की जांच की जाएगी और यदि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा या निर्माण पाया गया तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
सरथूवा गांव में सरकारी भूमि को लेकर उठे इस विवाद ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है। अब लोगों की निगाहें प्रशासनिक जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
