
ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग का अधिकांश हिस्सा पहले ही पक्का बनाया जा चुका है, लेकिन वन विभाग की सीमा में आने वाले करीब 600 मीटर हिस्से पर अनुमति न मिलने के कारण निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया। परिणामस्वरूप बरसात के मौसम में यह रास्ता दलदल में बदल जाता है और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस मार्ग से प्रतिदिन स्कूली बच्चे, किसान, महिलाएं, बुजुर्ग और मरीज गुजरते हैं। बारिश के दौरान दोपहिया वाहन फिसलने का खतरा बना रहता है, जबकि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। कई लोग यहां फिसलकर चोटिल भी हो चुके हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क निर्माण पूरा कराने की मांग को लेकर कई बार तहसील प्रशासन, विकास खंड और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। अधूरी सड़क के कारण लोगों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए करीब 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के लखनऊ मंडल महामंत्री हरिपाल सिंह ने कहा कि यदि जल्द ही वन विभाग से आवश्यक अनुमति लेकर निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया, तो संगठन ग्रामीणों के साथ आंदोलन करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर वन विभाग कार्यालय का घेराव भी किया जाएगा।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए विभागीय औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कर सड़क निर्माण शुरू कराया जाए, ताकि वर्षों से चली आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
