मोहनलालगंज, लखनऊ: मोहनलालगंज थाना क्षेत्र के खुजौली गांव में एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मृतका के परिजन इसे हत्या का मामला बताते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि अब तक की विवेचना में हत्या के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले हैं। इसी आधार पर हत्या से संबंधित धारा हटाकर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मृतका के पति को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।

परिजनों का आरोप है कि घटना से कुछ समय पहले विवाहिता ने अपनी बड़ी बहन को फोन कर जान का खतरा होने की बात कही थी। उनका कहना है कि बहन ने बातचीत के दौरान रोते हुए बताया था कि उसके साथ कोई अनहोनी हो सकती है। सूचना मिलने पर जब परिवार के लोग उसके ससुराल पहुंचे तो वह फंदे से लटकी मिली। परिजनों का दावा है कि पहले उसकी हत्या की गई और बाद में घटना को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को फंदे पर लटका दिया गया।

मृतका के परिवार ने स्थानीय पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शुरुआती जांच के दौरान मामले को सही दिशा में नहीं ले जाया गया और हत्या की आशंका को नजरअंदाज किया गया। परिजनों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस के अनुसार, मृतका की मां की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की गई थी। विवेचना के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर हत्या से संबंधित धारा हटाकर भारतीय न्याय संहिता की आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई।

जांच के क्रम में पुलिस ने रविवार को मृतका के पति अनिल कुमार रावत उर्फ छोटू को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।

पूछताछ के दौरान आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसकी पत्नी सोशल मीडिया, विशेष रूप से इंस्टाग्राम, पर अन्य लोगों से बातचीत करती थी, जिसे लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। आरोपी का दावा है कि घरेलू विवाद के चलते उसकी पत्नी ने आत्महत्या की। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह आरोपी का बयान है और इसकी स्वतंत्र जांच की जा रही है।

थाना प्रभारी रामबाबू सिंह ने बताया कि विवेचना अभी जारी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की गई है। यदि जांच के दौरान कोई नया तथ्य या प्रमाण सामने आता है, तो उसके अनुरूप धाराओं में संशोधन करते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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