लखनऊ। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने स्पष्ट किया है कि उनका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि वे केवल धर्म, गौसंरक्षण और मतदाताओं के अधिकार जैसे विषयों पर अपनी बात रखते हैं और इन्हीं मुद्दों के लिए संघर्ष करते हैं।

एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 में काशी में हुए आंदोलन के समय समाजवादी पार्टी की सरकार में उन पर लाठीचार्ज हुआ था। उस दौरान भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता उनके समर्थन में मौजूद थे, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उनका किसी राजनीतिक दल से जुड़ाव है। उन्होंने कहा कि उस समय तत्कालीन सरकार ने उन्हें भाजपा समर्थक समझ लिया था।

शंकराचार्य ने कहा कि वे न भाजपा के पक्ष में हैं और न कांग्रेस या किसी अन्य दल के विरोध या समर्थन में। उनका उद्देश्य केवल धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को उठाना है। उन्होंने कहा कि वे किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता या अनुदान स्वीकार नहीं करते और उनके संस्थान भी बिना सरकारी ग्रांट के संचालित होते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि किसी भी सरकार की नीति धर्म, गौसंरक्षण या जनहित से जुड़े विषयों पर सवाल खड़े करती है तो वे उसका विरोध करेंगे, चाहे सत्ता में कोई भी दल हो। उनके अनुसार, किसी राजनीतिक दल के बजाय मुद्दों के आधार पर अपनी बात रखना ही उनकी प्राथमिकता है।

गौसंरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए शंकराचार्य ने कहा कि जनता की सहमति के बिना ऐसे निर्णय नहीं होने चाहिए, जिनका संबंध व्यापक सामाजिक और धार्मिक भावनाओं से हो। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी शक्ति मतदाता के पास होती है और जनप्रतिनिधियों को जनता की भावना का सम्मान करना चाहिए।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने दोहराया कि उनका लक्ष्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध करना नहीं, बल्कि धर्म और समाज से जुड़े मूलभूत विषयों पर जनजागरण करना है।

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