निगोहां, लखनऊ। दखिना गांव में चल रही सात दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन कथा व्यास आचार्य जयशंकर शुक्ला जी महाराज ने भगवान शिव, माता सती और राजा दक्ष के यज्ञ प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए क्षेत्र सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंडाल में पहुंचे और पूरे समय श्रद्धा भाव से कथा का रसपान किया।
कथा के दौरान आचार्य जयशंकर शुक्ला ने बताया कि राजा दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में जाने से पहले भगवान शिव ने माता सती को समझाया था कि जहां सम्मान न हो, वहां जाने से बचना चाहिए। इसके बावजूद माता सती अपने पिता के घर पहुंचीं, लेकिन वहां भगवान शिव का अपमान देखकर वे अत्यंत व्यथित हो गईं। पति के अपमान को असहनीय मानते हुए उन्होंने यज्ञ कुंड में आत्मसमर्पण कर दिया। इस मार्मिक प्रसंग को सुनकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

आचार्य ने कहा कि यह प्रसंग हमें जीवन में सम्मान, विश्वास और मर्यादा के महत्व का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि दांपत्य जीवन की मजबूती परस्पर सम्मान और विश्वास पर आधारित होती है। अहंकार व्यक्ति के पतन का कारण बनता है, जबकि विनम्रता, प्रेम और सद्भाव जीवन को सुख और शांति की ओर ले जाते हैं।
कथा के बीच-बीच में भगवान शिव के भजनों और “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर कथा का आनंद लेते रहे।
आयोजन समिति के सदस्य अनमोल तिवारी ने बताया कि सात दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। उन्होंने क्षेत्रवासियों से कथा में शामिल होकर आध्यात्मिक ज्ञान और धर्म लाभ प्राप्त करने की अपील की।
