निगोहां, लखनऊ। रक्षाबंधन और आगामी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर पीएम श्री कंपोजिट माध्यमिक विद्यालय निगोहां में उत्साह का माहौल है। पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों को रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के उद्देश्य से विद्यालय में राखी निर्माण और जन्माष्टमी की तैयारियां कराई जा रही हैं। इसी क्रम में छात्र-छात्राओं ने घर में आसानी से उपलब्ध सामग्री से आकर्षक राखियां तैयार कीं।
रंगीन धागों और मोतियों से सजीं राखियां
राखी निर्माण गतिविधि में बच्चों ने रंग-बिरंगे धागे, मोती, कागज, ऊन और अन्य सजावटी सामान का इस्तेमाल किया। विद्यार्थियों ने अपनी कल्पना के अनुसार अलग-अलग डिजाइन की राखियां बनाईं। शिक्षकों ने बच्चों को घर में उपलब्ध अनुपयोगी या बची हुई सामग्री का रचनात्मक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।

इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों को ‘वेस्ट से बेस्ट’ की अवधारणा समझाने के साथ उनके हस्तकौशल, रचनात्मक सोच और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया।
जन्माष्टमी की झांकी तैयार करने में जुटे विद्यार्थी
रक्षाबंधन के साथ विद्यालय में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। छात्र-छात्राएं भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप और उनकी बाल लीलाओं पर आधारित झांकी तैयार कर रहे हैं। विद्यालय परिसर की सजावट के लिए भी बच्चे स्वयं विभिन्न सामग्री तैयार कर रहे हैं।
विद्यालय की प्रधानाध्यापक ममता ने बताया कि विद्यार्थियों के कौशल विकास के लिए त्योहारों से जुड़ी गतिविधियां पहले से शुरू करा दी जाती हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय गतिविधि आधारित सीखने के अवसर देना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों से विद्यार्थियों में रचनात्मकता, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और सहयोग की भावना विकसित होती है। साथ ही उन्हें भारतीय संस्कृति और परंपराओं को करीब से समझने का अवसर मिलता है।
संस्कृति से जुड़ने के साथ सीखने का अवसर
विद्यालय में होने वाली इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों को त्योहारों के सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व से परिचित कराना भी है। स्वयं राखी बनाना, झांकी तैयार करना और सजावट में हिस्सा लेना विद्यार्थियों को योजना बनाने, सामग्री का चयन करने और मिलकर काम करने का व्यावहारिक अनुभव दे रहा है।
बच्चों द्वारा तैयार की गई रंग-बिरंगी राखियां विद्यालय में आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। कम लागत और घर में उपलब्ध सामग्री से बनाई गई इन राखियों ने यह संदेश दिया कि रचनात्मकता के लिए महंगी सामग्री नहीं, बल्कि कल्पनाशीलता और मेहनत जरूरी है।
विद्यालय प्रशासन का कहना है कि शिक्षा के साथ कला, संस्कृति और व्यवहारिक कौशल से जुड़ी गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलने के साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान की भावना भी विकसित होती है।
