मोहनलालगंज, लखनऊ। किसानों, मजदूरों और ग्रामीणों की विभिन्न समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) गुट ने सोमवार को मोहनलालगंज तहसील परिसर में धरना-प्रदर्शन किया। तहसील अध्यक्ष रामनन्द रावत के नेतृत्व में जुटे कार्यकर्ताओं ने राजस्व से जुड़े मामलों, किसानों की भूमि संक्रमणीय कराने, सरकारी व तालाब की जमीनों पर कथित कब्जे और आवंटन संबंधी शिकायतों की जांच समेत कई मांगें उठाईं। प्रदर्शन के बाद उपजिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। भाकियू पदाधिकारियों का कहना था कि तहसील क्षेत्र की कई समस्याओं को लेकर पहले भी अधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से किसानों में असंतोष है। संगठन ने संबंधित मामलों का नियमानुसार जल्द निस्तारण कराने की मांग की।

आवंटित कृषि भूमि को संक्रमणीय कराने की मांग

ज्ञापन में भाकियू ने कहा कि तहसील क्षेत्र में कई किसानों को कृषि भूमि आवंटित की गई थी, लेकिन लंबे समय बाद भी कुछ मामलों में भूमि को संक्रमणीय नहीं किया गया है। इससे संबंधित किसानों को राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। संगठन ने नियमानुसार आवंटित कृषि भूमि को संक्रमणीय करने की प्रक्रिया पूरी कराने की मांग की।

समेसी में सीलिंग भूमि का मामला उठाया

ग्राम सभा समेसी में सीलिंग खाते की जमीन पर पूर्व में किए गए कृषि आवंटन का मामला भी प्रदर्शन के दौरान उठाया गया। भाकियू ने आरोप लगाया कि करीब 23-24 वर्ष बीतने के बावजूद कुछ पात्र किसानों को आवंटित जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका है। संगठन ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराकर पात्र किसानों को भूमि पर कब्जा दिलाने की मांग की।

करोरा की तालाब भूमि को लेकर जांच की मांग

ग्राम करोरा की गाटा संख्या 2846क को लेकर भी भाकियू ने शिकायत रखी। संगठन का दावा है कि पुराने राजस्व अभिलेखों में यह जमीन तालाब के रूप में दर्ज रही है। भाकियू ने आरोप लगाया कि अभिलेखों में कथित हेरफेर कर सरकारी भूमि पर कब्जे का प्रयास किया गया और वर्तमान में वहां प्लाटिंग किए जाने की शिकायत है। यूनियन ने इस मामले की उच्चस्तरीय समिति से जांच कराने की मांग की है।

मत्स्य पालन के लिए तालाब आवंटन का मुद्दा

गौरिया खुर्द के तालाब की गाटा संख्या 256ख, जिसका रकबा 8.549 हेक्टेयर बताया गया है, के मत्स्य पालन के लिए आवंटन का मामला भी ज्ञापन में शामिल रहा। भाकियू के अनुसार, 16 अक्टूबर 2025 को आयोजित नीलामी शिविर में मत्स्य जीवी सहकारी समिति लिमिटेड करोरा की ओर से आवेदन किया गया था और निर्धारित धनराशि भी जमा की गई थी। इसके बावजूद तालाब का पट्टा नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए संगठन ने राजस्व नियमों के अनुसार मामले का निस्तारण कराने की मांग की।

वरासत और बंजर भूमि से जुड़े मामलों पर सवाल

ग्राम करोरा की गाटा संख्या 2412घ से संबंधित वरासत आदेश पर भी भाकियू ने सवाल उठाए। संगठन ने अभिलेखों में नाम को लेकर कथित विसंगतियों का हवाला देते हुए पूरे मामले की जांच कराने और दोष पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की। वहीं, समेसी की गाटा संख्या 2821, जिसका रकबा 0.824 हेक्टेयर बताया गया है, पर कथित कब्जे और प्लाटिंग का मामला भी उठाया गया। संगठन ने तालाब एवं अन्य सरकारी भूमि से संबंधित शिकायतों की राजस्व अधिकारियों से जांच कराने की मांग की।

130 बीघा सरकारी जमीन का मामला भी उठाया

भाकियू ने ग्राम सभा समेसी की गाटा संख्या 13, 14 और 15 से संबंधित करीब 130 बीघा जमीन का मामला भी अधिकारियों के सामने रखा। संगठन के अनुसार, यह भूमि पूर्व में राज्य सरकार के नाम दर्ज थी। भाकियू ने आरोप लगाया कि 11 सितंबर 2026 को पारित आदेश में राज्य सरकार और ग्राम प्रधान का पक्ष उचित तरीके से नहीं सुना गया। संगठन ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और सरकारी भूमि को सुरक्षित रखने की मांग की। इसके अलावा ग्राम करोरा की आर-6 में दर्ज पुराने आदेश का खतौनी में गलत अंकन ठीक कराने, उतरगांव की तालाब खाते की भूमि के मत्स्य पालन के लिए आवंटन और अमृत सरोवर से संबंधित शासनादेशों के पालन की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।

पुलिया और बिजली की समस्याओं पर भी जताई नाराजगी

किसानों ने क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं भी उठाईं। भाकियू के अनुसार, समेसी माइनर से ठकुरा नाला होते हुए रसूलपुर तक जाने वाले कच्चे मार्ग में नाले पर पुलिया नहीं है। इससे किसानों और ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी होती है। संगठन ने यहां पुलिया निर्माण की मांग की। बिजली व्यवस्था को लेकर भी किसानों ने शिकायतें रखीं। स्मार्ट मीटर से जुड़ी उपभोक्ताओं की समस्याओं, जर्जर विद्युत तारों और खंभों को बदलने तथा बिजली बिल संबंधी शिकायतों का निस्तारण कराने की मांग की गई। धरना-प्रदर्शन में रामनन्द रावत, रामसिंह, रमेश, शिवम कश्यप, चेतन शुक्ला, विश्वनाथ, दशरथ गुप्ता और गौरी शंकर समेत संगठन के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। भाकियू पदाधिकारियों ने कहा कि किसानों और ग्रामीणों से जुड़ी शिकायतों का नियमानुसार जल्द समाधान कराया जाना चाहिए।

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