लखनऊ। राजधानी लखनऊ में आयोजित वाल्मीकि समाज के राष्ट्रीय सम्मेलन में शिक्षा, रोजगार, सफाई कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याओं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। सम्मेलन में समाज के लोगों ने सफाई कार्य में लगे कर्मचारियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने और सम्मानजनक वैकल्पिक रोजगार से जोड़ने की मांग उठाई।
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा और कौशल विकास के माध्यम से वाल्मीकि समाज की नई पीढ़ी को पारंपरिक सफाई कार्य से बाहर निकलकर अन्य रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इसके साथ ही लंबे समय से संविदा पर कार्य कर रहे करीब 35 हजार सफाई कर्मचारियों के सातवें वेतनमान से जुड़े मुद्दे के समाधान की मांग रखी गई।
लखनऊ विकास प्राधिकरण में कार्यरत पांच हजार से अधिक कर्मचारियों के नियमितीकरण का मामला भी सम्मेलन में उठाया गया। इसके अलावा राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त विकास निगम की बंद योजनाओं को दोबारा शुरू करने, सफाई उपकरण उपलब्ध कराने तथा वाल्मीकि समाज के लोगों को ठेकेदारी के क्षेत्र में अवसर देने की मांग की गई।
आगामी विधानसभा चुनाव के संदर्भ में सम्मेलन में राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग भी सामने आई। वक्ताओं ने उत्तर प्रदेश के विधानसभा क्षेत्रों में वाल्मीकि समाज को पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने और प्रत्येक क्षेत्र से समाज के लोगों को टिकट दिए जाने की मांग रखी।
कार्यक्रम में मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो, राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार समाज कल्याण असीम अरुण, राज्य मंत्री नगर विकास राकेश राठौर, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग से जुड़े रवि रामू कलोसे सहित विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
सम्मेलन में मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, झारखंड और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के पदाधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद रहे। वक्ताओं ने सफाई कर्मचारियों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए रोजगार, शिक्षा और सरकारी योजनाओं तक बेहतर पहुंच की जरूरत पर जोर दिया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेश उटमालिया, राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव राजू प्रधान, राष्ट्रीय सचिव आकाश पुष्कर, गुजरात प्रदेश अध्यक्ष जलपेश बघेला, झारखंड प्रदेश अध्यक्ष किस्मत कुमार भुइयां, छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष मयूर हटेल, पूर्वी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष सुंदर लाल आनंद, पश्चिम उत्तर प्रदेश अध्यक्ष आकाश आनंद समेत बड़ी संख्या में वाल्मीकि समाज के लोग और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
