लखनऊ/लखीमपुर खीरी। लखीमपुर खीरी स्थित निर्मल आश्रम गुरुद्वारा प्रकरण को लेकर ऑल इंडिया सिख पंजाबी वेलफेयर काउंसिल ने गुरुद्वारे के प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और रिसीवर नियुक्त करने की मांग उठाई है। काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार हरपाल सिंह जग्गी और प्रदेश अध्यक्ष सरदार हरपाल सिंह राणा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सरदार बलदेव सिंह औलख से उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान उन्हें ज्ञापन सौंपकर मामले में निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि 8 अक्टूबर 2026 को निर्मल आश्रम गुरुद्वारा प्रकरण में महंत के भतीजे प्रभु दमन सिंह पर गुरु ग्रंथ साहिब के पवित्र अंगों को क्षतिग्रस्त कर शारदा नदी में बहाने का आरोप सामने आया था। काउंसिल के अनुसार, इस घटना से सिख समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। मामले के सभी तथ्यों की पुष्टि जांच के आधार पर किए जाने की मांग की गई है।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि इससे पहले 9 अक्टूबर को सिख समाज के प्रतिनिधियों ने अपर पुलिस अधीक्षक और उपजिलाधिकारी को ज्ञापन देकर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की थी। काउंसिल ने गुरुद्वारे की मौजूदा व्यवस्था और वहां संचालित गतिविधियों की भी जांच कराने की आवश्यकता जताई।
गुरुद्वारे के प्रबंधन के लिए रिसीवर नियुक्त करने की मांग
काउंसिल ने मांग की कि निर्मल आश्रम गुरुद्वारे के प्रबंधन और संपत्तियों की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सक्षम न्यायालय अथवा विधिक रूप से अधिकृत प्राधिकारी के माध्यम से रिसीवर नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाए। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी सुझाव दिया कि स्थायी और पारदर्शी व्यवस्था स्थापित होने तक गुरुद्वारा सिंह सभा, लखीमपुर खीरी के माध्यम से मुख्य ग्रंथी को धार्मिक सेवा एवं मर्यादा से जुड़ी जिम्मेदारियां सौंपने पर विचार किया जाए।
गुरुद्वारे की भूमि और धनराशि के उपयोग की जांच हो
ज्ञापन में गुरुद्वारे की संपत्तियों से संबंधित संभावित वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि गुरुद्वारे की भूमि से जुड़े दो प्लॉटों को परिवर्तित कर करीब एक करोड़ रुपये में बेचे जाने का कथित मामला सामने आया है। काउंसिल ने भूमि के स्वामित्व, संबंधित अभिलेखों, बिक्री प्रक्रिया और प्राप्त धनराशि के इस्तेमाल की जांच कराने की मांग की।
काउंसिल का कहना है कि जांच में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जिन लोगों की जिम्मेदारी सामने आए, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित तथ्यों का निर्धारण जांच के बाद ही हो सकेगा।
कृषि मंत्री ने अधिकारियों से की बातचीत
प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक, आरोपी प्रभु दमन सिंह को हिरासत में लेकर जेल भेजे जाने के बाद भी गुरुद्वारे के प्रबंधन, धार्मिक मर्यादा और संपत्तियों की सुरक्षा से जुड़ी मांगों पर ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है। काउंसिल ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की अपील की।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि कृषि मंत्री सरदार बलदेव सिंह औलख ने मामले का संज्ञान लेते हुए जिला स्तर के संबंधित अधिकारियों से बातचीत की। साथ ही, जिलाधिकारी की ओर से शीघ्र आवश्यक कार्रवाई किए जाने का आश्वासन दिए जाने की जानकारी भी प्रतिनिधिमंडल को दी गई।
काउंसिल ने उम्मीद जताई कि शासन और प्रशासन सिख समाज की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए गुरुद्वारे की संपत्तियों की सुरक्षा, प्रबंधन में पारदर्शिता और धार्मिक मर्यादा बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे।
ये रहे प्रतिनिधिमंडल में शामिल
प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार हरपाल सिंह जग्गी, प्रदेश अध्यक्ष सरदार हरपाल सिंह राणा, लखीमपुर खीरी के जिला अध्यक्ष सरदार गुरप्रीत सिंह, पीलीभीत के जिला अध्यक्ष सरदार परमजीत सिंह, सरदार हरपाल सिंह भुल्लर, काउंसिल के उपाध्यक्ष सरदार सुखदेव सिंह, सरदार अमनदीप सिंह, सरदार निशान सिंह और सरदार सुक्खू प्रधान सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।
