लखनऊ। बधिर और श्रवण बाधित बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए राजधानी में एक नई पहल की गई है। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआईएमएस) परिसर स्थित सेंटर ऑफ बायोमेडिकल रिसर्च (सीबीएमआर) की डॉ. उत्तम ब्रेन लैब ने हिंदी और अंग्रेजी के अक्षर सिखाने के लिए 3डी एनिमेटेड वीडियो शृंखला तैयार की है। इसके जरिए तीन से आठ वर्ष तक के बच्चे अक्षरों की पहचान करने के साथ उन्हें बनाने और लिखने का अभ्यास भी कर सकेंगे।
इस शिक्षण सामग्री को खास तौर पर इस तरह तैयार किया गया है कि बच्चों को सीखने के लिए सुनने या मौखिक निर्देशों पर निर्भर न रहना पड़े। वीडियो में चित्रों, वस्तुओं और गतिविधियों के माध्यम से अक्षरों को समझाने के साथ उन्हें लिखने का सही क्रम भी दिखाया गया है। इससे विशेष विद्यालयों के शिक्षकों और अभिभावकों को बच्चों की शुरुआती शिक्षा के लिए एक नया दृश्य आधारित संसाधन मिल सकेगा।
हिंदी और अंग्रेजी के अक्षर होंगे शामिल
सीबीएमआर की ओर से तैयार इस वीडियो शृंखला में अंग्रेजी वर्णमाला के सभी 26 अक्षर, हिंदी के 13 स्वर और 36 व्यंजन शामिल किए गए हैं। इसके अलावा शिक्षकों और अभिभावकों को वीडियो के इस्तेमाल का तरीका समझाने के लिए हिंदी और अंग्रेजी में दो-दो मिनट के निर्देशात्मक वीडियो भी बनाए गए हैं।
संस्थान के अनुसार, यह शिक्षण सामग्री लैब में वर्ष 2018 से 2024 के बीच प्रकाशित मस्तिष्क संबंधी सात अध्ययनों के निष्कर्षों पर आधारित है। इसका उद्देश्य बच्चों को उनकी जरूरत के अनुरूप दृश्य माध्यम से अक्षर सीखने और लिखने का अभ्यास उपलब्ध कराना है।
चित्र देखकर पहचानेंगे अक्षर, फिर करेंगे लिखने का अभ्यास
सीबीएमआर के वैज्ञानिक डॉ. उत्तम कुमार के मुताबिक, सामान्य तौर पर बच्चों को अक्षर सिखाने में सुनने और बोलने की भूमिका अहम होती है, लेकिन बधिर और श्रवण बाधित बच्चों के लिए दृश्य आधारित तरीके से सीखने के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है।
वीडियो में पहले किसी वस्तु या गतिविधि को दिखाया जाता है। इसके बाद उससे संबंधित अक्षर और उसे लिखने का क्रम प्रदर्शित किया जाता है। बच्चे पहले हवा में उंगली से अक्षर बनाने का अभ्यास कर सकते हैं और फिर कॉपी या कागज पर उसे लिखने की कोशिश कर सकते हैं।
प्रत्येक अक्षर को एक निश्चित क्रम में दिखाने से बच्चों को उसकी बनावट समझने और चरणबद्ध तरीके से अभ्यास करने में मदद मिल सकती है। जरूरत के अनुसार शिक्षक किसी भी हिस्से पर वीडियो रोककर बच्चों को दोबारा अभ्यास भी करा सकते हैं।
स्कूल से लेकर घर तक कर सकेंगे इस्तेमाल
इस वीडियो शृंखला की खासियत यह है कि इसके इस्तेमाल के लिए महंगे उपकरण या विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं होगी। विशेष विद्यालयों में शिक्षक इसे बड़े पर्दे पर दिखाकर बच्चों को अक्षर पहचानने और लिखने का अभ्यास करा सकेंगे। अभिभावक भी मोबाइल फोन या टीवी के माध्यम से घर पर बच्चों को यह सामग्री दिखा सकते हैं।
सीबीएमआर के मुताबिक, इस संसाधन का इस्तेमाल विशेष विद्यालयों, समावेशी विद्यालयों, पुनर्वास केंद्रों और शुरुआती हस्तक्षेप कार्यक्रमों में किया जा सकता है। कॉक्लियर इम्प्लांट या श्रवण यंत्र का उपयोग करने वाले बच्चों के लिए भी यह अक्षरों की पहचान और लिखने के क्रम को समझने में सहायक शिक्षण सामग्री बन सकती है।
हालांकि, हर बच्चे की सीखने की गति और जरूरत अलग होती है। इसलिए शिक्षकों और अभिभावकों को बच्चों की क्षमता के अनुसार अभ्यास कराना होगा।
विशेषज्ञों के सहयोग से तैयार हुई सामग्री
लैब प्रमुख डॉ. उत्तम कुमार ने बताया कि मस्तिष्क संबंधी शोध के निष्कर्षों के आधार पर बधिर बच्चों के लिए एनिमेटेड शिक्षण वीडियो तैयार करना एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इस परियोजना में डॉ. मृत्युंजय मिश्रा, श्रवण बाधित विभाग, डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय तथा एसजीपीजीआईएमएस के हेड एंड नेक सर्जरी विभाग के डॉ. अमित केशरी का सहयोग रहा।
उन्होंने बताया कि वीडियो शृंखला को लैब की वेबसाइट पर निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि शिक्षक, अभिभावक और संबंधित संस्थान इसका लाभ उठा सकें। इस पहल का उद्देश्य श्रवण बाधित बच्चों के लिए अक्षर सीखने की प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाना और उन्हें अपनी गति से अभ्यास करने का अवसर देना है।
