UP News: उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण इलाकों में घरों और जमीन के स्वामित्व को वैध करने की दिशा में एक अहम कदम उठाने जा रही है। सरकार जल्द ही ग्रामीण आबादी अभिलेख विधेयक 2025 विधानमंडल में पेश करेगी। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बसे लोगों को घरौनी (स्वामित्व प्रमाण पत्र) में संशोधन कराने की सुविधा दी जाएगी। प्रस्तावित कानून के मुताबिक, जब किसी व्यक्ति को घरौनी प्रमाणपत्र मिलेगा, तो वह या अन्य संबंधित पक्ष छह महीने के भीतर इस पर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। यह आपत्ति सहायक रिकॉर्ड ऑफिसर (एआरओ) के पास की जा सकेगी।
पहले नहीं मिलता था बैंक लोन
अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की जमीनें या मकान राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होते थे, जिससे उन्हें बैंक से लोन लेने में कठिनाई होती थी और विवादों की स्थिति में भी समस्या आती थी। इसको दूर करने के लिए सरकार ने 2020 में ‘घरौनी प्रबंध नियमावली’ लागू की थी, लेकिन वह किसी कानून के तहत नहीं थी। अब उसे एक रूप देने की तैयारी सरकार कर रही है।
सर्वे और प्रमाणपत्र की प्रक्रिया होगी पारदर्शी
नए विधेयक के अनुसार, सर्वे की प्रक्रिया उप जिलाधिकारी (एआरओ) की निगरानी में होगी, जबकि तहसीलदार और नायब तहसीलदार सर्वे टीम व राजस्व निरीक्षक के काम पर नजर रखेंगे। सर्वे में मकानों, खाली जमीन, सड़क, बिजली, नालियां, हैंडपंप, मंदिर, रेलवे लाइन, और अन्य सार्वजनिक स्थानों का पूरा विवरण भी दर्ज किया जाएगा। अगर कोई पक्ष एआरओ के फैसले से सहमत नहीं है, तो वह जिला रिकॉर्ड ऑफिसर यानी जिलाधिकारी (डीएम) के पास अपील कर सकता है। इसके बाद भी मामला न सुलझे, तो सिविल कोर्ट में भी जाने का विकल्प खुला रहेगा। सूत्रों के अनुसार, विधेयक का प्रारूप तैयार हो चुका है और विधायी विभाग इसकी समीक्षा कर रहा है। इसे मानसून सत्र में विधानसभा में पेश किए जाने की संभावना है।
