नई दिल्ली: नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के बीच अदालत ने एक अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कहा है कि किसी कंपनी की हर गतिविधि को मनी लॉन्ड्रिंग नहीं माना जा सकता। कोर्ट का ये बयान इस हाई-प्रोफाइल केस में नया मोड़ ला सकता है।
इस मामले में कांग्रेस के शीर्ष नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कई बड़े नामों से पूछताछ हो चुकी है। ईडी ने आरोप लगाया था कि यंग इंडियन कंपनी के जरिए कांग्रेस नेताओं ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की संपत्तियों पर कब्जा किया और यह मनी लॉन्ड्रिंग की श्रेणी में आता है।
लेकिन अब अदालत ने कहा है कि “सिर्फ इसलिए कि कोई कंपनी लेन-देन कर रही है, या संपत्ति ले रही है, उसे मनी लॉन्ड्रिंग नहीं कहा जा सकता। जब तक यह साबित न हो कि पैसे का स्रोत अवैध है, तब तक हर एक्टिविटी को अपराध नहीं माना जा सकता।”
क्या है नेशनल हेराल्ड केस?
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नेशनल हेराल्ड अखबार की शुरुआत 1938 में पंडित नेहरू ने की थी।
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बाद में इसके संचालन के लिए बनी कंपनी AJL को कांग्रेस से जुड़ी Young Indian नाम की कंपनी ने टेकओवर किया।
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ED का आरोप है कि इस टेकओवर के जरिए बड़ी संपत्ति पर कब्जा किया गया और इसे अवैध फंडिंग का जरिया बनाया गया।
कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस पार्टी लगातार इस केस को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है। पार्टी का कहना है कि उनके नेताओं को बेवजह निशाना बनाया जा रहा है। अब कोर्ट की ये टिप्पणी कांग्रेस के दावे को मजबूती दे सकती है। मामले की अगली सुनवाई जल्द होगी। हालांकि यह अंतिम फैसला नहीं है, लेकिन कोर्ट की यह टिप्पणी ED की जांच की दिशा और धार दोनों को प्रभावित कर सकती है।
