UP: उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा उपकरण निर्माण इकाई स्थापित करने के एवज में रिश्वत लेने के आरोपी निकांत जैन की परेशानी कम होती नहीं दिख रही है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायाधीश सत्येंद्र सिंह ने शुक्रवार को उनकी रिहाई का आदेश दिया था, जिसमें उन्हें दो-दो लाख रुपये की जमानत और निजी मुचलका दाखिल करना था। हालांकि, जेल से छूटने से पहले ही शनिवार को वजीरगंज थाने में उनके खिलाफ एक नई FIR दर्ज हो गई, जिससे उनकी रिहाई की राह मुश्किल हो गई है।
नई FIR में भी पुराने आरोप
हसनगंज बावली निवासी हसन रजा अब्बासी ने निकांत और उनके सहयोगी एम.ए. खान पर वसूली का आरोप लगाते हुए नया मामला दर्ज कराया है। यही नहीं, वर्ष 2019 में भी हसन ने वजीरगंज थाने में निकांत, एम.ए. खान और ध्रुव कुमार दास पर 50 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई थी। हसन रजा के अनुसार, वह सरोसा भरोसा में स्थित अपनी 82 लाख की जमीन 65 लाख रुपये में बेचने को राज़ी हुए थे, लेकिन उन्हें केवल 15 लाख रुपये ही मिले। आरोप है कि सौदा करवाने में निकांत, एम.ए. खान और ध्रुव कुमार शामिल थे।
सौर ऊर्जा घोटाले से शुरू हुई गिरफ्तारी
निकांत पर आरोप है कि उन्होंने एक आईएएस अधिकारी के नाम पर सौर ऊर्जा इकाई लगाने के लिए कंपनी संचालक विश्वजीत दत्ता से एक करोड़ रुपये रिश्वत ली। इस पर 20 मार्च को गोमतीनगर थाने में मामला दर्ज हुआ और उसी दिन उनकी गिरफ्तारी हुई थी। एसआईटी ने 1600 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, और पुलिस कस्टडी की अर्जी देर से दिए जाने के कारण खारिज हो गई थी, जिससे जमानत का रास्ता खुला। मगर अब नई FIR के चलते उनकी रिहाई अटक सकती है।
