सत्संग: 7 तारीख, शनिवार को, दिन में 11 बजकर 11 मिनट (11:11 बजे) पर जो साधना में बैठ जाएगा और 24 घंटे का साधना शिविर चालू करा देगा, उसको देखना कितनी दया गुरु महाराज देते हैं। वह खुद बताएगा कि हमको क्या फायदा हो रहा है, कहने की जरूरत नहीं है। यह साधना शिविर बाबा उमाकांत जी महाराज के मार्गदर्शन में आयोजित हो रहा है, जिसमें सतगुरु की पूजा, ध्यान, भजन, और प्रवचन शामिल हैं।
जिसके पास जो जगह हो, जिस भी मोहल्ले में, जिस भी कॉलोनी में, जिस भी गांव में, वहां पर आप लोग एक जगह पर 24 घंटे का साधना शिविर का आयोजन कर दो, मौसम-परिस्थितियों को देखते हुए और लोगों से कह दो कि 10.30 बजे तक वहां पहुंच जाएं, जहां 24 घंटे की साधना करनी है। 10:30 बजे से एक प्रार्थना बोल दी जाए और उसके बाद में कोई उनको समझा दे कि भाई साधना में बैठने का यह नियम है।
साधना में बैठने के नियम…
1. अगर मान लो किसी को नींद आ रही है, तो फट से उठ गए और मुंह धो कर के, टहल-घूम करके, नींद को हटा करके फिर आ गए।
2. यह बता दिया जाए कि कुछ लोग यहां बैठे ही रहेंगे। कम से कम कोशिश यह रहे कि 5 आदमी बराबर बैठे रहें वहां पर। उसके लिए चाहे तो जो गांव, कॉलोनी, मोहल्ले के जिम्मेदार हो, वह ड्यूटी लगा दें कि भाई 4 घंटे की ड्यूटी आपकी रहेगी, फिर 4 घंटे की ड्यूटी दूसरे की रहेगी, तो ड्यूटी वाले में से ही कोई न कोई 2-3 आदमी बैठे रहें। रात में देखो कुछ लोग पहरा लगाते हैं, नौकरी करते हैं, कुछ लोग रात में विदेशों में काम करते हैं कम्प्यूटर पर; ऐसे भी प्रेमी हैं तो उनकी ड्यूटी लगा दें रात में। रात में उनको नींद नहीं आती है, वह रात भर जागते हैं और दिन में सोते हैं। ऐसे लोग जब न मिलें तो जिम्मेदार लोग खुद बैठें वहां और लोगों को बैठाने की कोशिश करें कि खंडित न हो यह 24 घंटे की साधना, कोई न कोई वहां ध्यान में रहें ही 2-4 आदमी, ऐसी व्यवस्था बना दी जाए।
3. इस नियम के बारे में बता दें कि कोई शोर-शराबा नहीं होगा। छोटे बच्चे ले करके जो बच्चियां आएंगी वो बहुत दूर बैठेंगी अगर आती ही हैं तो, ताकि वो बच्चे रोएं नहीं, कुछ बोलें नहीं, क्योंकि बाधा पड़ जाती है।
(अभी उज्जैन में साधना शिविर लगी तो वहां पर डायरियों में लिख कर लोगों ने दिया कि हमको यह फायदा हुआ, यह चढ़ाई हुई, ऐसा हमने देखा, ऐसा हमने सुना, तो बहुत सी डायरियां लिखी तो रखी हुई हैं, मौका नहीं मिला देखने का लेकिन मालूम है हमको कि किसको मिला। वो चीज छिपाएं नहीं छिपती है। आप यह समझो “केतिक करे उपाय” लेकिन जो मिल गया अंतर में वो छुपने वाला नहीं होता है, वो तो जो प्रकाश है, रोशनी है, जो इनके अंदर शक्ति है, वो रोम-रोम से निकलती है, जानने वाले, पहचानने वाले, जैसे जो दृष्टांत आपको अभी सुनाया उसमें बताया कि हीरे को किसने पहचाना? जौहरी उधर से जा रहा था, उसने हीरे को उठा लिया और मालामाल हो गया; तो पहचानने वाले पहचानते हैं। तो पहचान में आ रहे हैं वो लोग।
अब यह कोई पुरुष लोग मत सोचो कि इनको (महिलाओं को) नहीं मिलता है, इनको ज्यादा मिलता है क्योंकि यह बात को पकड़ लेती हैं, अमल करती हैं उस बात पर और उनके कर्म पुरुषों से अच्छे हैं क्योंकि यह घर में रहती हैं और मेहनत करती हैं, सेवा करती हैं और सेवा का फल मिलता है। तो सेवा का फल इनको मिल जाता है।
तो एक देवी का डायरी हमने उठाया, पढ़ा, तो उसने कहा कि “ हम यह देख रहे थे, हमारी चढ़ाई ऊपर हो गई थी, हम शरीर को भूल गए थे, हमारा शरीर सुन्न हो गया था, लेकिन आगे बढ़ने की कोशिश जैसे कर रह थे कि हम और आगे बढ़ जाएं, आगे देखें, आगे का सुनें तब तक किसी ने पीछे से लात मार दिया निकलते समय, उसी साधना में वो भी साधना कर रहा था तो उसका पैर लग गया और पैर लग गया जब तो आंख खुल गई, आत्मा शरीर में आ गई।” उसके बाद उसने कहा कि बहुत कोशिश किया लेकिन फिर वहां तक भी नहीं पहुंच पाए, अब तो गुरु महाराज की दया होगी तब होगा; ऐसा हो जाता है, तो उसका भी दोष लगता है। साधक को साधना करते समय अगर बाधा डाल दिया जाए तो उसका दोष लगता है। जैसे कोई खा रहा हो, तो रोटी क्यों खिलाते हैं? कि इसका मन खुश हो जाएगा, आत्मा को खुराक मिल जाएगा, हमको आशीर्वाद मिलेगा। तो कोई खा रहा हो और उसका भोजन छीन लो तो उसको अच्छा लगेगा? जो आपको आशीर्वाद दे रहा था, उसकी आत्मा, उसका मन जो आशीर्वाद दे रहा था कि देखो हम भूखे थे और उन्होंने हमको रोटी खिलाया, हम खुश हो जा रहे हैं। तो जो खुश हो कर आशीर्वाद देने को था, अब वो आशीर्वाद देगा? वो तो श्राप देगा; नाश हो जाए तुम्हारा, हमारा भोजन छीन लिए, तुम मर जाओ, मिट जाओ, तुम नाती-पोता न देख पाओ, तुम और दुनिया को न देख पाओ, तुम अंधे हो जाओ, कोढ़ी – अपाहिज हो जाओ; जो भी उसके मन में आएगा, बोलेगा। ऐसे आत्मा को खुराक मिलता है अंदर से। तो बाधा कभी भी नहीं डालना चाहिए, यह कोशिश करना चाहिए।
4. बहुत कुछ जिम्मेदारी साधना शिविर लगवाने वाले पर यह रहती है कि लोगों को पहले से समझाया जाए। लोगों को पहले से बताया जाए, लोगों को पहले से यह बात बताई जाए कि भाई थोड़ा कम खाना। कम खाओगे तो नींद नहीं आएगी, कम पानी थोड़ा पियोगे तो उस दिन मान लो लैट्रिन थोड़ी कड़ी ही हो गई लेकिन मरोगे नहीं। नहीं तो बार-बार पेशाब जाना पड़ेगा। और पेशाब जाना ही पड़ता है मान लो बार-बार, कोई बुड्ढे हैं, तो पीछे की तरफ बैठ जाए तो किसी को धक्का-मुक्की तो नहीं लगेगा और नहीं तो बुढ़ापे में चक्कर आ जाए और गिर जाए किसी के ऊपर, वो भी गिर जाए हाथ पैर टूट जाए; तो यह सब बात लोगों को बतानी पड़ेगी। तो यह सब जिम्मेदारी किसकी होगी? यह सब जिम्मेदारी उनकी होगी जो साधना शिविर लगवाएंगे।
