UP: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। सपा से निष्कासित विधायक राकेश प्रताप सिंह अब लगातार समाजवादी पार्टी और उसके शीर्ष नेतृत्व पर तीखे सवाल उठा रहे हैं। बुधवार को उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से एक पोस्ट साझा करते हुए पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को सीधे तौर पर कठघरे में खड़ा किया।
राकेश प्रताप सिंह ने अपने पोस्ट में राज्यसभा और विधान परिषद में सदस्यों के चयन को लेकर पुराने मामलों को उठाया और दावा किया कि कुछ नामों को ऊंचे “पैकेज” के आधार पर भेजा गया था। उन्होंने पूछा कि जब पार्टी सत्ता में थी, तब श्री सेठ नामक व्यक्ति को विधान परिषद भेजने के लिए क्या कोई आर्थिक सौदेबाजी हुई थी, और जब उनका नाम तत्कालीन राज्यपाल ने अस्वीकार कर दिया था, तो क्या उन्हें बाद में और बड़ा पैकेज देकर राज्यसभा भेजा गया?उन्होंने यह भी कहा कि अगर वर्तमान में “पैकेज राजनीति” पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो यह उचित होगा कि भूतकाल में हुई सौदेबाजी पर भी से पर्दा हटे।
गौरतलब है कि हाल ही में भाजपा के राज्यसभा उम्मीदवार को समर्थन देने के कारण सपा ने राकेश प्रताप सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। इसके बाद उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पार्टी अपने मूल विचारों से भटक चुकी है। उनके अनुसार, अब उनके लिए राम, राष्ट्र और सनातन पहले हैं, पार्टी बाद में।
उनके इस बयान के बाद स्थानीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाओं की झड़ी लग गई है। तरसड़ा गांव के अधिवक्ता महेंद्र शुक्ल ने व्यंग्य करते हुए कहा, “अब राम की याद आ गई है, राम ही कल्याण करेंगे।” वहीं, माधवपुर के निवासी विपिन तिवारी और दीपक का कहना है कि राजनीति में कुछ भी संभव है, और आने वाला वक्त सच्चाई को सामने लाएगा। यह पूरा घटनाक्रम आगामी राजनीतिक समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकता है, खासकर पूर्वांचल की राजनीति में।
