लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती को लेकर विवाद एक बार फिर उफान पर है। आरक्षित वर्ग के हजारों अभ्यर्थियों ने मंगलवार को राजधानी लखनऊ में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव किया। इस दौरान अभ्यर्थियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और नारेबाज़ी हुई। पुलिस ने हालात काबू में करने के लिए प्रदर्शनकारियों को हटाया और कई को हिरासत में लेकर ईको गार्डन पहुंचाया।
अभ्यर्थियों की मुख्य मांगें
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19,000 आरक्षित पदों पर हुई कथित गड़बड़ियों की जांच
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सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों के अनुरूप नई चयन सूची जारी करना
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नियुक्ति प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की गारंटी देना
क्या है मामला?
69,000 शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया 2019 से विवादों में रही है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2020 और 2022 में जारी चयन सूचियों को रद्द कर तीन महीने के भीतर नई सूची जारी करने का आदेश दिया।
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कोर्ट ने यह भी कहा कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार अगर सामान्य वर्ग की मेरिट सूची में आते हैं तो उन्हें सामान्य कोटे में शामिल किया जाए।
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अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार ने इस आदेश को सही तरीके से लागू नहीं किया और हजारों योग्य उम्मीदवारों को बाहर कर दिया गया।
राजनीतिक रुख
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डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अभ्यर्थियों का समर्थन करते हुए कहा कि आरक्षण व्यवस्था के साथ कोई अन्याय नहीं होना चाहिए।
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वहीं, सीएम योगी आदित्यनाथ ने पहले इस आंदोलन को विपक्ष की राजनीतिक साजिश बताया था।
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इस विरोधाभासी बयानबाज़ी ने मामले को और गरमा दिया है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने डिप्टी सीएम आवास के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी। भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बैरिकेडिंग की गई। अधिकारियों ने अभ्यर्थियों से वार्ता करने और उनकी समस्याओं को सरकार तक पहुँचाने का भरोसा दिया है। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट और सरकार के पाले में है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक उनकी नियुक्ति की मांगें पूरी नहीं होतीं, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
