UP Smart meter scam: उत्तर प्रदेश के कई जिलों में स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। मामला सीतापुर का है, जहां उपभोक्ताओं के घरों पर स्मार्ट मीटर लगाने के बाद पुराने मीटरों की रीडिंग या तो शून्य कर दी गई, या फिर उन्हें क्षतिग्रस्त दिखाकर हटा लिया गया। इससे निगम के राजस्व पर बड़ा असर पड़ा है।

सीतापुर में दर्ज हुई रिपोर्ट

मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के अवर अभियंता ने सीतापुर में स्मार्ट मीटर कंपनी के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी के कर्मचारियों ने पुराने मीटर न तो विभाग को लौटाए और न ही सही स्थिति में उपलब्ध कराए। जांच में सामने आया कि कई मीटरों की डिस्प्ले को लेजर और अन्य तरीकों से नष्ट कर दिया गया, जिससे पुरानी रीडिंग ली ही नहीं जा सकी।

अन्य जिलों में भी गड़बड़ी

गोंडा और बलरामपुर जिलों में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आई हैं। यहां भी हजारों मीटर क्षतिग्रस्त पाए गए, जिसके कारण बिलिंग प्रभावित हुई है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर कंपनियों ने जल्द ही पुराने मीटर जमा नहीं किए, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विभागीय संपत्ति पर कब्जे का आरोप

अधिकारियों का कहना है कि पुराने मीटर विभाग की संपत्ति हैं, लेकिन कंपनियों ने उन्हें हड़प लिया। इससे न केवल उपभोक्ताओं के बिल सही तरीके से तैयार नहीं हो पाए, बल्कि निगम को लाखों रुपये का सीधा नुकसान उठाना पड़ा।

जांच जारी, बड़ा घोटाला होने की आशंका

मध्यांचल निगम के वाणिज्य निदेशक योगेश कुमार ने बताया कि कंपनी के अधिकारियों पर मामला दर्ज हो चुका है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। वहीं, विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर के नाम पर बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ है और इसमें निगम के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत भी हो सकती है।

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