देश की सबसे बड़ी आर्थिक धोखाधड़ी में से एक माने जा रहे सहारा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा कदम उठाया है। एजेंसी ने सहारा समूह के संस्थापक सुब्रत रॉय सहारा के बेटे को भगोड़ा घोषित कर दिया है। साथ ही 1.74 लाख करोड़ रुपये के इस घोटाले में विशेष अदालत में चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
सहारा समूह पर आरोप है कि उसने लाखों निवेशकों से भारी रकम जुटाई और उसे फर्जी कंपनियों, शेल अकाउंट्स और जटिल नेटवर्क के जरिए इधर-उधर कर दिया। लोगों को ऊंचे ब्याज और बेहतर रिटर्न का लालच देकर निवेश कराया गया, लेकिन बाद में न मूलधन लौटा और न ही ब्याज।
ED की जांच के मुताबिक, सहारा की कई कंपनियों ने नियमों को दरकिनार कर फंड इकट्ठा किया और उसे गलत तरीके से इस्तेमाल किया। यही वजह है कि अब इस केस को भारत के सबसे बड़े पोंजी स्कीम घोटालों में गिना जा रहा है।
चार्जशीट में क्या है खास?
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सहारा समूह के कई शीर्ष अधिकारियों के नाम चार्जशीट में शामिल।
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1.74 लाख करोड़ की रकम को अवैध तरीके से इकट्ठा करने का आरोप।
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अदालत से आरोपियों की संपत्ति जब्त करने की मांग।
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भगोड़ा घोषित आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ।
निवेशकों की मुश्किलें
लाखों निवेशक आज भी अपना पैसा वापस पाने का इंतजार कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जिम्मेदारी SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) को सौंपी थी, लेकिन अब तक ज्यादातर लोगों को राहत नहीं मिल पाई है।
सहारा की डूबती साख
एक वक्त था जब सहारा समूह का नाम रियल एस्टेट, एयरलाइंस, मीडिया और खेल स्पॉन्सरशिप तक फैला हुआ था। लेकिन लगातार कानूनी पचड़ों और वित्तीय गड़बड़ियों ने इसकी साख को बुरी तरह प्रभावित किया। सुब्रत रॉय खुद भी कई बार जेल की हवा खा चुके हैं।
