लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 558 मदरसों की जांच पर फिलहाल रोक लग गई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा की जा रही इस जांच पर अंतरिम स्टे देते हुए सरकार से चार हफ्तों में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
क्यों हो रही थी जांच?
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यह कार्रवाई राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के निर्देशों पर शुरू हुई थी।
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आरोप थे कि मदरसों में अवैध फंडिंग, नियुक्तियों में अनियमितता, और अनुदान में गड़बड़ी हुई है।
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खासकर कोरोना काल के बाद 308 शिक्षकों की भर्ती को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।
कोर्ट ने क्यों रोकी जांच?
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वाराणसी टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया और अन्य ने आयोग के आदेश को चुनौती दी थी।
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याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि NHRC के आदेश उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
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जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की डबल बेंच ने तर्क सुनने के बाद जांच पर रोक लगाई।
अब आगे क्या?
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हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि अगले आदेश तक NHRC और सरकार के निर्देश प्रभावी नहीं रहेंगे।
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राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को 4 हफ्तों में जवाब दाखिल करना होगा।
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मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2025 को होगी।
