लखनऊ: सहारा इंडिया का कभी चमकता हुआ 47 वर्षीय व्यावसायिक और रियल एस्टेट साम्राज्य अब घटती पकड़ एवं कानूनी दबाव के बीच पतन के कगार पर है। लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और जिला प्रशासन ने सहारा की कई महत्वपूर्ण संपत्तियों की लीज की समीक्षा शुरू कर दी है, कुछ पर कार्रवाई भी हो चुकी है।
🔍 मुख्य बिंदु
| कार्रवाई | संपत्तियों की संख्या / नाम | कारण / समस्या |
|---|---|---|
| लीज की समीक्षा | 19 संपत्तियां शामिल (कमर्शियल, आवासीय, कार्यालय आदि) | |
| सील की गई संपत्तियां | • कपूरथला कॉम्प्लेक्स, गए सहारा भवन-1 और भवन-2, अलीगंज | |
| बकाया राशि | लगभग ₹19.80 करोड़ जिला प्रशासन / LDA के सामने बकाया | |
| लीज अवधि समाप्ति | सहारा बाजार की लीज 09 जनवरी 2017 को समाप्त हो गई थी, नवीनीकरण नहीं हुआ | |
| भूमि कब्जा / अन्य जमीनें | गोमती नगर-उजरियांव व जियामऊ इलाकों में 130 एकड़ जमीन नगर निगम ने कब्जा ली; अन्य जमीनें भी कार्रवाई के दायरे में |
क्या हो रही है शिकायतें
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व्यापारियों का कहना है कि बिना पूर्व सूचना के और वैधानिक प्रक्रिया का पालन न करते हुए उनकी दुकानों/संपत्तियों को खाली कराने के आदेश जारी किए जा रहे हैं।
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कुछ दुकानदारों के पास वैध दस्तावेज हैं, लेकिन उनकी मांगों पर न्यायालय से आदेश होने के बावजूद कार्रवाई तुरंत प्रभाव से की गई।
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प्रशासन की स्थिति
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प्रशासन का कहना है कि लीज की शर्तों का उल्लंघन हुआ है, जिनमें से एक महत्वपूर्ण शर्त यह थी कि लीज प्राप्त भूमि का उपयोग कॉमर्शियल उद्देश्य के लिए ही होना चाहिए, न कि निजी आवासीय या अन्य अनधिकृत उपयोग के लिए।
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बकाए बकाया अदायगी न होने के कारण भी सीलिंग की गई है। कुछ भवनों और कार्यालयों का सील होना इस कारण से है कि राजस्व, श्रम न्यायालय या रीयल एस्टेट नियामक (RERA) की देयता न चुकाई गई हो
