नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक हैरान कर देने वाली घटना हुई। न्याय और गरिमा के प्रतीक माने जाने वाले इस संस्थान में एक वकील ने अपनी मर्यादा तोड़ते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई की ओर जूता फेंकने की कोशिश की। यह सब कुछ कुछ ही सेकंड में हुआ, लेकिन उस पल कोर्टरूम में मौजूद हर व्यक्ति सन्न रह गया। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत फुर्ती दिखाते हुए आरोपी वकील को काबू में कर लिया, जबकि वह लगातार नारे लगाता रहा — “सनातन का अपमान नहीं सहेंगे!”
न्यायालय में मचा हड़कंप, CJI गवई रहे शांत
घटना के तुरंत बाद कोर्टरूम में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। वकीलों, याचिकाकर्ताओं और पत्रकारों के चेहरों पर तनाव झलकने लगा। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान CJI बी.आर. गवई पूरी तरह संयमित रहे। उन्होंने अदालत में मौजूद वकीलों को शांत करते हुए कहा -“इससे परेशान न हों, मैं भी परेशान नहीं हूं। इन चीज़ों से मुझे फर्क नहीं पड़ता।” इसके बाद उन्होंने अदालत की कार्यवाही जारी रखने का निर्देश दिया।
किस बात पर भड़का वकील?
मिली जानकारी के अनुसार, आरोपी वकील CJI गवई की एक पुरानी टिप्पणी से नाराज़ था। दरअसल, 16 सितंबर को खजुराहो के जवारी (वामन) मंदिर में भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति की बहाली से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान CJI गवई ने कहा था -“जाओ और भगवान से खुद करने को कहो। अगर आप विष्णु के भक्त हैं तो उनसे प्रार्थना करें।” यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी, जिसके बाद कुछ समूहों ने इसे “सनातन धर्म का अपमान” बताया था। इसी टिप्पणी से नाराज होकर वकील ने सोमवार को यह कदम उठाया।
क्या है भगवान विष्णु की मूर्ति का मामला?
मध्य प्रदेश के खजुराहो स्थित जवारी मंदिर में भगवान विष्णु की लगभग 7 फीट ऊंची मूर्ति मौजूद है, जो वर्षों से खंडित अवस्था में है।
एक याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से इस मूर्ति की पुनर्स्थापना की मांग की थी। लेकिन अदालत ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि -“मूर्ति जिस स्थिति में है, उसी में रहेगी। भक्त चाहें तो किसी अन्य मंदिर में पूजा कर सकते हैं।” अदालत ने यह भी कहा कि धार्मिक मुद्दों में न्यायपालिका की भूमिका सीमित है और ऐसे मामलों को धार्मिक संस्थाओं या प्रशासनिक स्तर पर सुलझाया जाना चाहिए।
घटना के बाद बढ़ाई गई सुरक्षा
वकील की इस हरकत के बाद सुप्रीम कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दिल्ली पुलिस और कोर्ट सुरक्षा इकाई ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
साथ ही आरोपी वकील से पूछताछ की जा रही है कि उसने यह कदम क्यों उठाया और उसके पीछे कौन-सी मंशा थी। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और कहा-“यह न्यायपालिका की गरिमा और वकालत की शपथ का उल्लंघन है। न्याय के मंदिर में हिंसा या आक्रोश की कोई जगह नहीं।”
यह घटना न केवल सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि धार्मिक भावनाओं के मुद्दे अब अदालत तक पहुंच गए हैं। हालांकि, CJI गवई के संयमित रवैये ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि “न्याय व्यवस्था किसी भी उकसावे से नहीं डगमगाती।”
