लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने मंगलवार को लखनऊ में आयोजित कांशीराम की पुण्यतिथि पर आयोजित महारैली में सपा और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। हजारों समर्थकों से भरे मैदान में मायावती ने कहा कि जो दल आज PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की बात कर रहे हैं, उन्हें यह फॉर्मूला सत्ता में रहते क्यों याद नहीं आया? मायावती ने तंज कसते हुए कहा, “जब सपा और कांग्रेस की सरकारें थीं, तब उन्होंने बहुजन समाज के लिए कुछ नहीं किया। अब चुनाव आते ही PDA की याद आ गई। यह सिर्फ वोट की राजनीति है, जनता को अब इनके छलावे में नहीं आना चाहिए।”
भाजपा पर नरम, विपक्ष पर तीखा रुख
रैली के दौरान मायावती ने जहां सपा और कांग्रेस पर सीधा हमला किया, वहीं भाजपा सरकार की कुछ योजनाओं की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि, “योगी सरकार ने हमारी योजनाओं का पैसा नहीं दबाया, जबकि सपा सरकार के समय बहुजन वर्ग के विकास कार्यों में अड़चनें डाली जाती थीं।” इस बयान को राजनीतिक हलकों में “मायावती का बदला रुख” माना जा रहा है। कई विश्लेषकों का कहना है कि बसपा प्रमुख 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अपने राजनीतिक समीकरण नए सिरे से साध रही हैं।
रैली में उमड़ा जनसैलाब
लखनऊ का कांशीराम स्मारक स्थल मंगलवार को नीले रंग में रंगा नजर आया। मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद के साथ मंच साझा किया और देशभर से आए समर्थकों का अभिवादन किया। बसपा कार्यकर्ताओं का कहना था कि यह सिर्फ श्रद्धांजलि सभा नहीं, बल्कि बसपा की ताकत का प्रदर्शन था। अनुमान है कि करीब पांच लाख से अधिक समर्थक इस रैली में पहुंचे।
‘PDA बनाम BSP’ की नई सियासी जंग
मायावती का यह बयान सीधे तौर पर अखिलेश यादव की PDA राजनीति को चुनौती माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि, “सपा जब सत्ता में थी, तब न दलितों का सम्मान हुआ, न पिछड़ों की हालत सुधरी। अब PDA की बात करना जनता को गुमराह करना है।” रैली के अंत में मायावती ने कार्यकर्ताओं से आगामी चुनावों में पूरी ताकत से बसपा को मजबूत करने का आह्वान किया और कहा कि, “अब वक्त आ गया है कि बहुजन समाज फिर से अपनी सरकार बनाए।”
