कानपुर: कानपुर के चर्चित वकील अखिलेश दुबे गिरोह प्रकरण में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) ऋषिकांत शुक्ला को निलंबित कर दिया गया है। SIT और विजिलेंस जांच में उनके पास करीब 100 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति मिलने का दावा किया गया है।
साथ ही, उन पर अखिलेश दुबे गिरोह का सहयोग करने का गंभीर आरोप भी लगा है। हालांकि, सीओ ऋषिकांत शुक्ला ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है और कहा कि उनकी संपत्ति कानूनी ढंग से अर्जित है।
कौन हैं पीपीएस ऋषिकांत शुक्ला?
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नाम: ऋषिकांत शुक्ला
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पिता का नाम: कुशेश्वर शुक्ला
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जन्म: 7 जुलाई 1968
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मूल निवासी: देवरिया, उत्तर प्रदेश
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सेवा बैच: 2021 बैच, प्रांतीय पुलिस सेवा (PPS)
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वर्तमान पद: क्षेत्राधिकारी (CO), भोगांव, मैनपुरी
ऋषिकांत शुक्ला ने पुलिस सेवा में आने के बाद लंबे समय तक कानपुर नगर में कार्य किया। वह 1998 से लेकर 2009 तक कानपुर में विभिन्न पदों पर तैनात रहे।
2021 में उन्हें पुलिस उपाधीक्षक (CO) के पद पर प्रोन्नति मिली, जिसके बाद उनकी तैनाती उन्नाव और फिर मैनपुरी में हुई।
पूरा मामला क्या है?
कुछ समय पहले कानपुर पुलिस ने वकील अखिलेश दुबे को गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप था कि वे फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर, ब्लैकमेलिंग और वसूली में सक्रिय एक गिरोह चला रहे थे। इस गिरोह में पुलिसकर्मी, वकील और कुछ पत्रकार भी शामिल बताए गए। SIT जांच के दौरान सीओ ऋषिकांत शुक्ला का नाम सामने आया। जांच में पता चला कि उन्होंने स्वयं, अपने परिजनों और साझेदारों के साथ मिलकर करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की है।
जांच में क्या सामने आया?
SIT और विजिलेंस की जांच में अब तक ये तथ्य सामने आए हैं:
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12 स्थानों पर 12 भूखंड और
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11 दुकानें (मुख्यतः आर्यनगर, कानपुर में)
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इन संपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य करीब ₹92 करोड़ बताया गया है।
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तीन अन्य स्थानों पर भी संपत्तियां पाई गईं, लेकिन उनके कागजातों की जांच अभी जारी है।
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बताया जा रहा है कि इन सभी संपत्तियों में ऋषिकांत शुक्ला का पैन नंबर जुड़ा हुआ है।
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आर्यनगर की 11 दुकानें उनके सहयोगी देवेन्द्र दुबे के नाम पर पाई गईं, जिन्हें “फ्रंटमैन” बताया जा रहा है।
अखिलेश दुबे का “दरबार” और जुड़े अफसर
अखिलेश दुबे के नेटवर्क में केवल पुलिस अधिकारी ही नहीं बल्कि कुछ वकील और पत्रकारों के नाम भी सामने आए हैं।
SIT की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कई पुलिस अफसर अखिलेश दुबे के नजदीकी या ‘दरबारी’ के रूप में काम करते थे।
इन अफसरों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है:
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डिप्टी एसपी विकास पांडेय (लखनऊ)
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डिप्टी एसपी संतोष कुमार सिंह (हरदोई)
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महेंद्र कुमार सोलंकी, पूर्व पीए (KDA VC), वर्तमान में बस्ती में तैनात
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कश्यप कांत दुबे, अन्य सहयोगी अधिकारी
SIT ने इन सभी अधिकारियों को दो बार स्पष्टीकरण नोटिस भी भेजा है।
सीओ ऋषिकांत शुक्ला का पक्ष
“मेरे खिलाफ लगाए गए सभी आरोप झूठे और राजनीतिक प्रेरित हैं। मैंने कोई भी संपत्ति गैरकानूनी तरीके से अर्जित नहीं की है।”
विजिलेंस और SIT दोनों ही विभागों की जांच जारी है। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा का अब तक का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार प्रकरण माना जाएगा। वहीं अगर आरोप खारिज होते हैं, तो यह जांच खुद पुलिस प्रतिष्ठान के भीतर की पारदर्शिता को भी परखेगी।
