पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान में अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की भी एंट्री हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बाद अब मायावती भी बिहार के रण में उतरने जा रही हैं। बसपा प्रमुख गुरुवार को कैमूर जिले के भभुआ में एक बड़ी चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगी। यह सभा भभुआ हवाई अड्डे के समीप आयोजित की जाएगी, जिसमें आसपास के जिलों और विधानसभा क्षेत्रों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों के पहुंचने की संभावना है।
बदल सकते हैं बिहार के सियासी समीकरण
मायावती के चुनावी मैदान में उतरने से बिहार की सियासत में दिलचस्प बदलाव देखने को मिल सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बसपा प्रमुख की सक्रियता से अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) गठजोड़ को झटका लग सकता है। साथ ही, महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव की संभावनाओं पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, मायावती की एंट्री से एनडीए गठबंधन को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
अकेले दम पर लड़ रही बसपा
बसपा इस बार बिहार विधानसभा चुनाव अकेले अपने दम पर लड़ रही है। पार्टी ने लगभग सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और मायावती के भतीजे आकाश आनंद, राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर रामजी गौतम, और वरिष्ठ नेता अनिल सिंह लगातार बिहार में प्रचार अभियान में जुटे हुए हैं। बसपा की इस बढ़ी हुई सक्रियता ने चुनावी माहौल में नया उत्साह और हलचल पैदा कर दी है।
भभुआ रैली पर टिकी सबकी निगाहें
अब सबकी नजरें मायावती की भभुआ रैली पर टिकी हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह रैली बसपा के लिए बिहार में नई सियासी दिशा तय कर सकती है।
दलित और पिछड़े वर्ग के वोटरों में बसपा का कितना असर पड़ेगा, यह रैली उसका संकेत दे सकती है।
