नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली की हवा एक बार फिर जहरीली हो गई है। कुछ दिनों की मामूली राहत के बाद मंगलवार को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) फिर से ‘बेहद खराब’ (Severe) श्रेणी में पहुंच गया। पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक, मौसम में बदलाव, पराली जलाने की बढ़ती घटनाएं और वाहनों से निकलने वाला धुआं राजधानी की हवा को एक बार फिर दमघोंटू बना रहे हैं।

AQI फिर 400 के पार

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार सुबह दिल्ली का औसत AQI 412 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। कुछ इलाकों जैसे आनंद विहार, वजीरपुर, बवाना और पंजाबी बाग में तो वायु गुणवत्ता सूचकांक 450 से भी ऊपर पहुंच गया।
इससे पहले सोमवार को AQI करीब 370 था, जिससे लोगों को थोड़ी राहत महसूस हुई थी।

सांस लेना हुआ मुश्किल

दिल्ली और एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ने से आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण बढ़ने लगे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस प्रदूषण का असर न सिर्फ बच्चों और बुजुर्गों पर, बल्कि स्वस्थ लोगों पर भी पड़ रहा है। AIIMS के पल्मोनरी विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि “लोग सुबह या देर शाम के समय घर से निकलने से बचें और N95 मास्क का इस्तेमाल करें। प्रदूषण में लंबे समय तक रहना फेफड़ों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।”

पराली और धुंध का ‘कॉकटेल’

पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में हाल के दिनों में तेजी आई है। इसी के कारण दिल्ली-एनसीआर की हवा में PM 2.5 और PM 10 कणों की मात्रा कई गुना बढ़ गई है। वहीं, हवा की रफ्तार धीमी होने से धुंध और प्रदूषण जमीन के पास ही जमा हो रहा है।

GRAP-III लागू, लेकिन असर नहीं

प्रदूषण पर काबू पाने के लिए दिल्ली सरकार ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत लेवल-III की पाबंदियां लागू कर दी हैं। इसके तहत निर्माण कार्यों पर रोक, डस्ट कंट्रोल अभियान और डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है। फिर भी प्रदूषण में फिलहाल कोई सुधार नहीं दिख रहा है।

विशेषज्ञों का कहना

पर्यावरण कार्यकर्ता सुनिता नारायण ने कहा “दिल्ली की हवा को साफ करने के लिए केवल GRAP काफी नहीं है। जरूरत है कि वाहनों, उद्योगों और पराली जलाने के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएं।”

अगले कुछ दिन और मुश्किल

मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अगले तीन दिनों तक हवा की दिशा और गति में खास बदलाव नहीं होगा, जिससे प्रदूषण का स्तर ‘बेहद खराब’ ही बना रहेगा।बारिश या तेज हवा न चलने तक राहत की उम्मीद बहुत कम है।

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