Kanpur Crime: कानपुर में चर्चित “लुटेरी दुल्हन” प्रकरण में मंगलवार को अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। पुलिस की रिमांड अर्जी को खारिज करते हुए आरोपी दिव्यांशी चौधरी को व्यक्तिगत बंधपत्र पर छोड़ने का आदेश जारी किया। अदालत का कहना है कि पुलिस रिमांड के समर्थन में पर्याप्त, ठोस और भरोसेमंद साक्ष्य पेश नहीं कर सकी।
दिव्यांशी चौधरी का मामला पिछले कुछ सप्ताहों में सुर्खियों में रहा है। मेरठ के मवाना की रहने वाली दिव्यांशी की शादी फरवरी 2024 में यूपी पुलिस के 2019 बैच के दरोगा आदित्य के साथ हुई थी। शादी के कुछ ही महीनों बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ा और दिव्यांशी ने पति पर आर्थिक शोषण और कई महिलाओं से अवैध संबंधों जैसे गंभीर आरोप लगाए। शिकायत कानून-व्यवस्था से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुँची, जिसके बाद मामले की विस्तृत जांच शुरू हुई।

लेकिन जांच आगे बढ़ते ही कहानी ने अप्रत्याशित मोड़ ले लिया। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार दिव्यांशी पहले भी तीन शादियाँ कर चुकी थी—जिसमें एक दरोगा और दो बैंक मैनेजर शामिल बताए गए। जांच में यह भी सामने आया कि उसने 12 से अधिक लोगों को अपने संबंधों और झूठे मुकदमों में फंसाकर बड़ी रकम वसूली। बैंक खातों में लगभग आठ करोड़ रुपये जमा मिलने का दावा भी रिपोर्ट में किया गया है।
पुलिस ने इस मामले में नए आपराधिक संहिता (BNS) की 12 धाराओं में केस दर्ज किया था और आगे की पूछताछ के लिए आठ धाराओं में रिमांड माँगी थी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि रिमांड का आदेश तब ही दिया जा सकता है जब उसके लिए पर्याप्त आधार और साक्ष्य हों। सुनवाई के दौरान रक्षा पक्ष ने तर्क दिया कि पुलिस की रिमांड याचिका में ठोस तथ्य नहीं हैं और सिर्फ आरोपों के आधार पर आरोपी को हिरासत में लेना न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए दिव्यांशी को व्यक्तिगत बंधपत्र पर रिहा करने का आदेश दिया।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि कोर्ट के इस फैसले के बाद अब पुलिस को अपनी जांच को और मजबूत बनाना होगा। वहीं, मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण की ओर बढ़ रहा है और आगे आने वाले दिनों में इस केस में और खुलासे हो सकते हैं। कानपुर में फिलहाल यह केस चर्चा का विषय बना हुआ है—क्योंकि इसमें शादी, विश्वास, धोखाधड़ी और कानून के इस्तेमाल से जुड़े कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
